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सुप्रीम कोर्ट: बिलकिस मामले में दोषियों की सजा में छूट को चुनौती वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

Thu, 12 Oct 2023 04:12 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने बिलकिस बानो के वकील और केंद्र, गुजरात सरकार और जनहित याचिका के याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनीं। इसके बाद कोर्ट ने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों की सजा माफ करने को दी चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषियों की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने केंद्र, गुजरात को मामले में दोषियों की सजा कम करने से संबंधित मूल रिकॉर्ड 16 अक्तूबर तक जमा करने का निर्देश दिया।

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जस्टिस बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने बिलकिस बानो के वकील और केंद्र, गुजरात सरकार और जनहित याचिका के याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों की सजा माफ करने को दी चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

गुजरात सरकार की ओर से दोषियों को दी गई छूट को चुनौती देने वाली बिलकिस बानो की याचिका के अलावा सीपीआई (एम) नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लौल और लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा सहित कई अन्य जनहित याचिकाएं भी दायर की गई थीं। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी दोषियों को सजा में छूट और समय से पहले रिहाई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है।
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क्या है मामला?
जब गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के डर से भागते समय बिलकिस बानों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। उस समय, बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं। दंगों में मारे गए उनके परिवार के सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
धन विधेयक, एएमयू अल्पसंख्यक दर्जा, अयोग्यता की अध्यक्ष की शक्तियों पर बड़ी पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की बृहद पीठें जल्द ही लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई शुरू करेंगी। इन मामलों में धन विधेयक, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का अल्पसंख्यक दर्जा, विधायकों को अयोग्य ठहराने की अध्यक्ष की शक्ति और विधायी विशेषाधिकारों के दायरे से संबंधित मामला शामिल हैं।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात-सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को 10 मामलों पर विचार किया। पीठ ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए एक सामान्य प्रक्रियात्मक आदेश पारित करेगी कि ये मामले आने वाले हफ्तों में जब भी लिए जाएं तो अंतिम सुनवाई के लिए तैयार हों।

इन मामलों में एक मामला है ‘एन रवि और अन्य बनाम अध्यक्ष, विधानसभा, तमिलनाडु’, जिसमें एक में यह सवाल उठाया गया है कि क्या मौलिक अधिकार संसदीय विशेषाधिकारों पर हावी होता है। यह मामला 2003 से संबंधित है, जब पत्रकार एन रवि और अन्य ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष के कालीमुथु द्वारा कथित विशेषाधिकार उल्लंघन और अवमानना के लिए उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिए जाने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने वृद्ध दंपती के तलाक को मंजूरी देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने 27 साल पुराने एक वैवाहिक विवाद का निपटारा करते हुए एक दंपती के तलाक को मंजूरी नहीं दी। उन्होंने कहा कि विवाह नामक संस्था समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कोर्ट ने कहा कि अदालतों में तलाक की अर्जी दायर करने की बढ़ती प्रवृत्ति के बावजूद भारतीय समाज में आज भी विवाह को एक महत्वपूर्ण और पवित्र बंधन माना जाता है। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 89 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसमें चंडीगढ़ की जिला अदालत के तलाक मंजूर करने संबंधी आदेश को पलट दिया गया था। उनकी पत्नी की आयु 82 वर्ष हैं।
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