संसद में याचिका दायर करने की व्यवस्था बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट चार हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। बता दें कि याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और अन्य को संसद में याचिका दायर करने और सुझाए गए मुद्दों पर संसद में विमर्श की व्यवस्था बनाने के निर्देश दे। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्न की पीठ के सामने यह याचिका सुनवाई के लिए आई। इस पर केंद्र सरकार के वकील ने इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिए कोर्ट से समय मांगा।
नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली अर्जी
माओवादियों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध रखने के आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से मुंबई से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने की मांग वाली अर्जी वापस ले ली। एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में नवलखा मुंबई में नजरबंद हैं। पिछले साल 10 नवंबर को, नवलखा (70) को शीर्ष अदालत ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण घर में नजरबंद रखने की अनुमति दी थी। दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली उनकी अर्जी शुक्रवार को जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नवलखा की अर्जी का विरोध किया था। कार्यकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने पीठ को बताया कि नवलखा मुंबई में रहने के लिए कोई अन्य जगह तलाशेंगे और वह आवेदन वापस ले लेंगी।
हिमालयी क्षेत्र की वहन क्षमता पर केंद्र से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले भारतीय हिमालयी क्षेत्र की वहन क्षमता और मास्टर प्लान के आकलन की मांग वाली याचिका पर केंद्र व अन्य से जवाब मांगा है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार, जलशक्ति मंत्रालय और अन्य को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ पूर्व आईपीएस अफसर अशोक कुमार राघव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
दूध में मिलावट को लेकर एफएसएसएआई को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दूध में मिलावट की रोकथाम के लिए जारी दिशा निर्देश का पालन नहीं करने पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न करना अवमानना का मामला बनता है।कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद करने का आदेश देते हुए कहा कि एफएसएसएआई को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने साफ किया कि कोर्ट के नोटिस को अवमानना के नोटिस के रूप में नहीं माना जाएगा, बल्कि नोटिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एफएसएसएआई कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए अपनी वैधानिक शक्ति का प्रयोग करे।