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Supreme Court: सिसोदिया की जमानत पर फैसला सुरक्षित; कृष्ण जन्मभूमि विवाद में हिंदू पक्ष ने दाखिल की कैविएट

Tue, 06 Aug 2024 02:32 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court - फोटो : PTI
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उच्चतम न्यायालय ने आबकारी नीति मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।  
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आबकारी मामले में मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा ने सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि मनीष सिसोदिया ने अपनी ताकत का दुरुपयोग किया और एक्साइज नीति तैयार करने में जनता का विश्वास तोड़ा। सिसोदिया बहुत प्रभावशाली हैं और जमानत मिलने पर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

स्कूल भर्ती घोटाले में पश्चिम बंगाल की याचिका पर सितंबर में सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार तथा अन्य की याचिकाओं पर सितंबर में सुनवाई करेगा। भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पक्षकारों को इन याचिकाओं पर 16 अगस्त तक जवाब देने का समय दिया है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 'पश्चिम बंगाल के मामलों में याचिकाकर्ताओं के लिए लिखित दलीलें दाखिल करने का समय अगले शुक्रवार तक बढ़ा दिया जाएगा।' पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी हैं। उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल के फैसले से संबंधित 33 याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे उच्चतम न्यायालय ने अब सितंबर में इन पर अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया है। उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल है।

पीठ कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य घोषित कर दिया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नियुक्तियों को रद्द करने के साथ-साथ सीबीआई को नियुक्ति प्रक्रिया की जांच करने और तीन महीने में एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था। राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (एसएलएसटी)-2016 द्वारा विज्ञापित 24,640 रिक्त पदों के लिए 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगे। 

शाही ईदगाह मस्जिद-कृष्ण जन्मभूमि विवाद में हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट  
मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद-कृष्ण जन्मभूमि विवाद में हिंदुओं द्वारा शुरू किए गए मुकदमों की मेंटेंब्लिटी(स्थिरता) को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक कैविएट दायर की है। अपनी कैविएट में हिंदू पक्ष ने कहा है कि यदि उसके समक्ष कोई अपील दायर की जाती है, तो उन्हें सुने बिना शीर्ष अदालत की ओर से कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय के समक्ष दायर मुकदमे कटरा, केशव देव में 13.37 एकड़ भूमि से संबंधित हैं। इन मुकदमों के माध्यम से मांगी गई मुख्य राहत, संबंधित भूमि से मस्जिद को हटाने का निर्देश है। भगवान कृष्ण के कई भक्तों द्वारा दावा किया गया है कि शाही ईदगाह मस्जिद भगवान की भूमि पर बनी है और भगवान कृष्ण का वास्तविक जन्मस्थान उसके नीचे है। यह आरोप लगाया गया है कि 13.37 एकड़ भूमि, जिसमें मस्जिद क्षेत्र भी शामिल है, कृष्ण जन्मभूमि भूमि है और मुसलमानों ने इस पर अवैध संरचना खड़ी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने डायरिया रोधी टीके के क्लिनिकल परीक्षण के केंद्र-वार डेटा की मांग वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डायरिया रोधी टीके रोटावैक के क्लिनिकल परीक्षण के केंद्र-वार डेटा की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति बी आर गवई और के वी विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता का आकलन करने के लिए दिल्ली, पुणे और वेल्लोर में तीन केंद्रों पर परीक्षण किए गए थे।  डेटा की जांच "सार्वजनिक हित में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) द्वारा की जानी चाहिए थी, लेकिन इसमें इतनी गोपनीयता है कि इसे इस शीर्ष निकाय को भी नहीं दिया गया है। 

अपील खारिज करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हम किसी विशेषज्ञ समिति के फैसले पर अपील में कैसे बैठ सकते हैं? हम एनटीएजीआई के फैसले पर अपील में नहीं बैठेंगे
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बाल विवाह कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ पर हावी होगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई के लिए सहमति जताई कि क्या बाल विवाह की अनुमति देने वाला मुस्लिम पर्सनल लॉ बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 पर हावी होगा। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की याचिका का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई की मांग की। याचिका को मंगलवार को सूचीबद्ध किया गया था लेकिन इस पर सुनवाई नहीं की गई क्योंकि पीठ किसी अन्य मामले पर सुनवाई कर रही थी। एसजी ने अनुरोध किया कि मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की जाए और इसका समाधान किया जाए क्योंकि विभिन्न हाईकोर्ट विपरीत निर्णय दे रहे हैं। एसजी ने कहा, विभिन्न हाईकोर्ट से अलग-अलग विचार लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी बुधवार या बृहस्पतिवार को प्राथमिकता के आधार पर इसे सूचीबद्ध किया जा सकता है क्योंकि नए निर्णय आ रहे हैं और हम अपीलों को बढ़ा रहे हैं। इस पर पीठ ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।
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