केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विधेयकों के संबंध में राज्यपाल की शक्तियों से जुड़े इस मामले में केरल हाईकोर्ट की एर्नाकुलम पीठ याचिका खारिज कर चुकी है। अब इस मामले में केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है।
केरल सरकार ने केरल उच्च न्यायालय की एर्नाकुलम पीठ के आदेश को चुनौती दी है। उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाली केरल सरकार विधेयकों को मंजूरी देने में जानबूझकर देरी के आरोप लगाए हैं। इससे पहले विधेयकों पर अनिश्चितकाल तक सहमति लंबित रखने के मामले में एक वकील की याचिका हाईकोर्ट की एर्नाकुलम पीठ ने खारिज कर दी थी। राज्यपाल की शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज होने के बाद अब मुख्यमंत्री पिनारई विजयन की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की है।
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राज्यपाल की कथित निष्क्रियता के लिए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका के बारे में एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत गवर्नर की सहमति में देरी को लेकर सरकार ने सवाल खड़े किए हैं।
बता दें कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के बाद, आरिफ मोहम्मद खान बिलों को मंजूरी देने में देरी का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत में इसी तरह की याचिका का सामना करने वाले तीसरे राज्यपाल होंगे। केरल सरकार की याचिका के अनुसार, तीन विधेयक दो साल से अधिक समय से राज्यपाल के समक्ष लंबित हैं।
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लंबित विधेयकों की सूची
श्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक (पहला संशोधन) 2021 विधेयक संख्या 50
विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक (पहला संशोधन) 2021 विधेयक संख्या 54
विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक (दूसरा संशोधन) 2021
केरल सहकारी सोसायटी संशोधन विधेयक 2022
विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक 2022
केरल लोकायुक्त संशोधन विधेयक 2022
विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक 2022
सार्वजनिक स्वास्थ्य विधेयक 2021
याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल के आचरण से केरल के लोगों के कल्याण के अधिकारों के अलावा, कानून के शासन और लोकतांत्रिक सुशासन सहित हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों और बुनियादी नींव पर खतरा पैदा हो गया है। सरकार का दावा है कि राज्यपाल ने जो विधेयक लंबित रखे हैं, इनके माध्यम से जनहित के कई उपायों को लागू किया जाना है।