प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से दिवाली की छुट्टियों के बाद मामले से जुड़े घटनाक्रम से उसे अवगत कराने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मिलकर प्रवर समिति के मुद्दे पर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ‘आप’ सांसद की माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे और आगे का रास्ता तलाशने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने आप सांसद की याचिका पर सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद करना तय किया। उन्होंने अटॉर्नी जनरल से इस बारे में होने वाली प्रगति की जानकारी देने को कहा।
विज्ञापन
राघव चड्ढा उस वक्त से निलंबित हैं, जब कुछ सांसदों ने आरोप लगाया था कि आप नेता ने उनकी सहमति के बिना एक प्रस्ताव में उनका नाम जोड़ा। आरोप लगाने वाले ज्यादातर सांसद भाजपा के हैं। प्रस्ताव में विवादास्पद दिल्ली सेवा विधेयक की पड़ताल के लिए एक प्रवर समिति के गठन की मांग की गई थी।
Supreme Court
- फोटो : ANI
आरएसएस के फ्लैग मार्च मामले में स्टालिन सरकार पहुंची कोर्ट
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को राज्य में फ्लैग मार्च निकालने की अनुमति देने के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए 6 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, याचिका पर 2 सप्ताह में केंद्र जवाब दाखिल करे
गंभीर अपराधों के आरोपी व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को 2 सप्ताह का समय दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सूचित किया कि संघ ने मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। पीठ ने कहा, भारत संघ के वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए और समय मांगा है। इसे दो सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाना है। शीर्ष अदालत जिसने पहले इस मुद्दे पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था, वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
TRAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, बंद मोबाइल नंबर 90 दिनों तक दूसरे को नहीं दिए जाते
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, एक बार उपयोग न करने के कारण निष्क्रिय कर दिए जाने या ग्राहक के अनुरोध पर डिस्कनेक्ट किए गए मोबाइल फोन नंबर कम से कम 90 दिनों तक नए ग्राहकों को आवंटित नहीं किए जाते हैं। शीर्ष अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें किसी मोबाइल नंबर के उपयोग न करने के कारण बंद या निष्क्रिय हो जाने पर डेटा के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई गई थी।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने ट्राई के जवाबी हलफनामे पर विचार किया। एक ग्राहक पिछले फोन नंबर से जुड़े व्हाट्सएप खाते को हटाकर और स्थानीय डिवाइस मेमोरी, क्लाउड या पर संग्रहित डेटा को मिटाकर व्हाट्सएप डेटा के दुरुपयोग को रोक सकता है। हम वर्तमान रिट याचिका के साथ आगे बढ़ने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि ट्राई द्वारा दायर जवाबी हलफनामे से यह स्पष्ट है कि एक बार गैर-उपयोग के लिए निष्क्रिय कर दिया गया या ग्राहक के अनुरोध पर डिस्कनेक्ट किया गया सेलुलर मोबाइल टेलीफोन नंबर उसे आवंटित नहीं किया जाता है।
शीर्ष अदालत ने 30 अक्टूबर को पारित अपने आदेश में कहा, यह पहले के ग्राहक पर निर्भर है कि वह गोपनीयता बनाए रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाए।
आय से अधिक संपत्ति का मामले को तेलंगाना से बाहर भेजने की मांग पर सीबीआई-जगन रेड्डी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले की सुनवाई किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सीबीआई और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी से जवाब मांगा है। याचिका में मामले को पटियाला हाउस कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ वाईएसआर कांग्रेस के असंतुष्ट सांसद रघु रामकृष्ण राजू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सीबीआई से पूछा कि मामले की सुनवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता एक चिंतित नागरिक है, जो 17वीं लोकसभा में संसद सदस्य के रूप में लोगों की सेवा कर रहा है। राज्य मशीनरी व सीबीआई के कार्य करने के तरीके से याचिकाकर्ता की अंतरात्मा हिल गई है। आंध्र प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री को अपने पक्ष में करने के लिए राज्य मशीनरी जांच में उदासीनता की हद तक हेरफेर कर रही है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने गैरकानूनी तरीके से खुद कमाई करने व अपनी कंपनियों को 40 हजार करोड़ रुपये तक का मुनाफा कमवाया जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। यही नहीं इसके बाद मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मुकदमा धीमी गति से चले और उनके खिलाफ कोई कदम न उठाए जाएं।