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Supreme Court: शरद पवार गुट की नए चुनाव चिह्न की मांग, 25 को सुप्रीम सुनवाई; अबू बकर की याचिका पर NIA को नोटिस

Fri, 20 Sep 2024 10:54 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मेनका गांधी ने पहले इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि जनप्रतिनिधि कानून के नियमों के तहत चुनाव के बाद 45 दिनों के भीतर याचिका दायर की जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की याचिका पर 30 सितंबर तक सुनवाई टाल दी है। मेनका गांधी ने सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर सपा सांसद राम भुयाल निषाद के चुनाव को चुनौती दी है। राम भुयाल निषाद ने बीते दिनों हुए लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी को सुल्तानपुर लोकसभा सीट से हरा दिया था। मेनका गांधी का दावा है कि राम भुयाल निषाद के खिलाफ 12 आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में सिर्फ आठ मामलों की ही जानकारी दी थी। मेनका गांधी ने निषाद पर अपना आपराधिक इतिहास छिपाने और हलफनामे में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है।
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मेनका गांधी ने पहले इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि जनप्रतिनिधि कानून के नियमों के तहत चुनाव के बाद 45 दिनों के भीतर याचिका दायर की जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव को चुनौती देने की 45 दिन की समय सीमा के नियम को भी चुनौती दी है। 

भवानी रेवन्ना के खिलाफ दायर याचिका पर भी टाली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार की उस याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी, जिसमें निलंबित जेडी(एस) नेता और दुष्कर्म के आरोपी प्रज्वल रेवन्ना की मां भवानी रेवन्ना को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। यह मामला एक अपहरण मामले में पीड़िता से जुड़ा है, जिसका कथित तौर पर प्रज्वल रेवन्ना ने यौन उत्पीड़न किया था और भवानी रेवन्ना ने पीड़िता को मामले की शिकायत करने से रोकने की कोशिश की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने रेवन्ना की ओर से पेश हुए वकील बालाजी श्रीनिवासन से मामले की स्थिति का ब्यौरा देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा।

श्रीनिवासन ने कहा कि मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है, अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और भवानी रेवन्ना ने जांच में सहयोग किया है। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। 10 जुलाई को शीर्ष अदालत ने मामले में भवानी रेवन्ना को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली कर्नाटक सरकार द्वारा दायर अपील पर उनसे जवाब मांगा। उच्च न्यायालय ने 18 जून को भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत देते हुए इस बात पर जोर दिया था कि उन्होंने जांच के दौरान पहले ही 85 सवालों के जवाब दे दिए हैं, जिससे यह दावा करना अनुचित है कि वह अपने बेटे के खिलाफ यौन शोषण के मामलों की जांच कर रही एसआईटी के साथ सहयोग नहीं कर रही हैं।

2015 कैश-फॉर-वोट मामला: SC ने तेलंगाना के सीएम को दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को निर्देश दिया कि वे 2015 के कैश-फॉर-वोट मामले की कार्यवाही में किसी भी तरह से हस्तक्षेप न करें, जिसमें वे एक आरोपी हैं। मामले की सुनवाई तेलंगाना से भोपाल स्थानांतरित करने से इनकार करते हुए जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक मामले के अभियोजन के संबंध में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट नहीं करेंगे। शीर्ष अदालत ने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामलों में बीआरएस नेता के. कविता को जमानत दिए जाने पर सीएम रेवंत रेड्डी की टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह उम्मीद की जाती है कि संविधान के सभी तीनों अंग एक-दूसरे के कामकाज के प्रति परस्पर सम्मान दिखाएंगे।

पूर्व PFI अध्यक्ष अबू बकर की याचिका पर NIA को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व प्रमुख ई अबू बकर की तरफ से दायर याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा। याचिका में आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले में अबू बकर की रिहाई की मांग की गई है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अबू बकर की याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि वह केवल चिकित्सा आधार पर जमानत के सवाल पर विचार करेगी। अबू बकर को 2022 में संगठन के खिलाफ व्यापक कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है। उसने निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन हाईकोर्ट ने भी 28 मई को जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

शरद पवार गुट की नए चुनाव चिह्न की मांग, 25 को सुप्रीम सुनवाई

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले, वरिष्ठ नेता शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों को नए चुनाव चिह्न देने की मांग की। शरद पवार गुट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि वे महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मामले की तत्काल सुनवाई होनी चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइया की पीठ ने याचिका पर सुनवाई 25 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दी।

MBBS दाखिले में स्थानीय कोटा संबंधी तेलंगाना HC के आदेश पर सुप्रीम रोक

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले में स्थानीय लोगों को कोटा देने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य के स्थायी निवासियों या यहां रहने वाले लोगों को सिर्फ इसलिए राज्य के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे तेलंगाना से बाहर पढ़ाई या निवास करते हैं। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने राज्य सरकार की अपील और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले कल्लूरी नागा नरसिम्हा अभिराम के जवाब पर नोटिस जारी किया। पीठ के समक्ष तेलंगाना सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आश्वासन दिया कि हाईकोर्ट जाने वाले 135 छात्रों को एक मौका दिया जाएगा। पीठ ने कहा, अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के 5 सितंबर वाले आदेश पर रोक रहेगी।

मेनका गांधी की याचिका पर सुनवाई 30 सितंबर तक स्थगित

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की उस याचिका पर सुनवाई 30 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी, जिसमें उन्होंने सुल्तानपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद राम भुआल निषाद के चुनाव को चुनौती दी है। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में निषाद ने मेनका गांधी को 43,174 वोटों के अंतर से हरा दिया था।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा को अन्य विशेष कानूनों में याचिका दाखिल करने की सीमा तय करने के प्रावधान का विश्लेषण करते हुए विस्तृत दलीलें दाखिल करने के लिए समय दिया।

मेनका गांधी ने एक अलग याचिका में चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए लगाई गई 45 दिनों की सीमा को चुनौती दी है। अपनी अपील में मेनका ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 अगस्त के आदेश को चुनौती दी, जिसमें निषाद के चुनाव को चुनौती देने वाली उनकी चुनाव याचिका को समय-सीमा समाप्त होने के कारण खारिज कर दिया गया था।
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समय से पहले मामले को सूचीबद्ध करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से मांगा स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपनी रजिस्ट्री को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत याचिका की समय से पहले सूचीबद्ध करने के बारे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। इस याचिका की सुनवाई मूल रूप से 14 अक्तूबर को होनी थी, लेकिन अप्रत्याशित रूप से इसे शुक्रवार को सूचीबद्ध कर दिया गया। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ इस घटनाक्रम से परेशान थी। उसे संभावित हेरफेर का संदेह था। उनका मानना था कि यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति जानबूझकर लिस्टिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। पीठ ने कहा, हम इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोई व्यक्ति हमारी रजिस्ट्री में जा रहा है और पिछले आदेश के विपरीत लिस्टिंग में हेरफेर कर रहा है। लिहाजा अदालत ने रजिस्ट्री को अनियमितता के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया।
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