फैसले को गलत तरीके से पेश करने पर पुलिस में शिकायत दर्ज करने का सुप्रीम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने एक आंतरिक जांच रिपोर्ट पर ध्यान देने के बाद अदालत के रजिस्ट्रार को पुलिस में शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक लंबित याचिका के साथ संलग्न उसका आदेश, मनगढ़ंत था।
जस्टिस एएस ओका और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ ने मंगलवार को रजिस्ट्रार (न्यायिक सूची) की रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि यह स्पष्ट था कि इस अदालत के आदेश की प्रति बताया जाने वाला दस्तावेज ‘मनगढ़ंत’ था। इसलिए, रजिस्ट्रार (न्यायिक सूची) को क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करके आपराधिक कानून को लागू करना चाहिए। पीठ ने संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को दो महीने के भीतर जांच के बारे में अदालत को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, हालांकि उनकी भूमिका की जांच करने के लिए वकील प्रीति मिश्रा को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने आज इस अदालत के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया है। अब वकील की भूमिका की जांच करना पुलिस का काम है।
पीठ ने रजिस्ट्रार को आदेश की एक प्रति पुलिस को सौंपने का भी निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने यह देखने के बाद आंतरिक जांच का आदेश दिया था कि एक मामले में एक ही पीठ के दो अलग-अलग आदेशों के साथ एक याचिका दायर की गई थी। पहला आदेश बर्खास्तगी का है और दूसरा आदेश एसएलपी की अनुमति देने का है। पीठ ने 22 अगस्त को रजिस्ट्रार (न्यायिक) को इस पहलू की जांच करने और 20 सितंबर, 2023 तक इस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। संबंधित वकीलों मिश्रा व आफताब अली खान और शिकायतकर्ता लोकेश मदनमोहन अग्रवाल को भी नोटिस जारी किया गया था।