फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: दुष्कर्म मामले में 40 साल की सुनवाई के बाद आरोपी को जमानत; हवाई किराये को लेकर दाखिल याचिका खारिज

Thu, 28 Sep 2023 05:50 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट में आज दो मामलों पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1983 के दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को जमानत दे दी है। वहीं खाड़ी देशों के लिए हवाई किरायों में बढ़ोतरी के खिलाफ जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वर्ष 1983 के दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा, इस मामले की एक अनोखी विशेषता है कि मुकदमे को समाप्त होने में चालीस वर्ष लग गए। शीर्ष अदालत उस व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कोलकाता उच्च न्यायालय के 17 मई के आदेश को चुनौती दी गई थी।
विज्ञापन





 

सुप्रीम कोर्ट: खाड़ी देशों के लिए हवाई किराये को लेकर जनहित याचिका खारिज

उच्चतम न्यायालय ने दुबई से कोच्चि और केरल के तिरुवनंतपुरम के लिए अत्यधिक हवाई किराए का आरोप लगाने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केरल प्रवासी एसोसिएशन से अपनी शिकायतों के साथ केरल उच्च न्यायालय जाने को कहा। जनहित याचिका में भारतीय विमानन अधिनियम के एक नियम को भी चुनौती दी गई, जो एयरलाइंस को टिकट की कीमतें निर्धारित करने की अनुमति देता है। आरोप लगाया कि यह नागरिकों के यात्रा करने के अधिकार का उल्लंघन करता है और इसके परिणामस्वरूप भारतीय यात्रियों का शोषण होता है।
विज्ञापन

फैसले को गलत तरीके से पेश करने पर पुलिस में शिकायत दर्ज करने का सुप्रीम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने एक आंतरिक जांच रिपोर्ट पर ध्यान देने के बाद अदालत के रजिस्ट्रार को पुलिस में शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक लंबित याचिका के साथ संलग्न उसका आदेश, मनगढ़ंत था।
जस्टिस एएस ओका और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ ने मंगलवार को रजिस्ट्रार (न्यायिक सूची) की रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि यह स्पष्ट था कि इस अदालत के आदेश की प्रति बताया जाने वाला दस्तावेज ‘मनगढ़ंत’ था। इसलिए, रजिस्ट्रार (न्यायिक सूची) को क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करके आपराधिक कानून को लागू करना चाहिए। पीठ ने संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को दो महीने के भीतर जांच के बारे में अदालत को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, हालांकि उनकी भूमिका की जांच करने के लिए वकील प्रीति मिश्रा को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने आज इस अदालत के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया है। अब वकील की भूमिका की जांच करना पुलिस का काम है। 

पीठ ने रजिस्ट्रार को आदेश की एक प्रति पुलिस को सौंपने का भी निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने यह देखने के बाद आंतरिक जांच का आदेश दिया था कि एक मामले में एक ही पीठ के दो अलग-अलग आदेशों के साथ एक याचिका दायर की गई थी। पहला आदेश बर्खास्तगी का है और दूसरा आदेश एसएलपी की अनुमति देने का है। पीठ ने 22 अगस्त को रजिस्ट्रार (न्यायिक) को इस पहलू की जांच करने और 20 सितंबर, 2023 तक इस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। संबंधित वकीलों मिश्रा व आफताब अली खान और शिकायतकर्ता लोकेश मदनमोहन अग्रवाल को भी नोटिस जारी किया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें