सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भ्रष्टाचार मामले में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को राहत दी है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके खिलाफ सीबीआई की जांच पर अंतरिम रोक लगाने के हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने मामले में हाईकोर्ट के 10 फरवरी के आदेश के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।
यह हुई बहस
यह है मामला
गौरतलब है, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने एजेंसी को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज मामले में एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले वर्ष 2020 के हैं। अदालत ने पिछले दो वर्षों में जांच की प्रगति पर सीबीआई से भी जानकारी मांगी थी। अदालत ने एजेंसी से पूछा था कि वह अंतिम रिपोर्ट कब दाखिल करेगी। उच्च न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख तक कार्यवाही रोक दी थी और मामले को स्थगित कर दिया था।
आयकर विभाग ने 2017 में शिवकुमार के परिसरों में छापे मारे थे। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी थी। ईडी की जांच के आधार पर सीबीआई ने कर्नाटक सरकार से कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मंजूरी मांगी थी। यह मंजूरी 25 सितंबर 2019 को मिली और तीन अक्टूबर 2020 को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिवकुमार ने प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
भाजपा नेता की मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में बीती 13 जुलाई को मार्च के दौरान हुई भाजपा नेता की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने को कहा है। याचिका में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी या फिर सीबीआई द्वारा जांच कराई जाए। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि 'हाईकोर्ट संवैधानिक संस्थाएं हैं और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उन्हें काफी शक्तियां मिली हुई हैं। स्थानीय हाईकोर्ट इसकी निगरानी कर सकते हैं और अगर उन्हें लगता है कि स्थानीय पुलिस सही तरीके से काम नहीं कर रही है तो वह सक्षम अधिकारियों के साथ एसआईटी का गठन कर सकते हैं।'