फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: सुप्रीम कोर्ट ने शिवकुमार को दी राहत, HC के सीबीआई जांच पर रोक लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार

Mon, 31 Jul 2023 12:58 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भ्रष्टाचार मामले में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को राहत दी है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके खिलाफ सीबीआई की जांच पर अंतरिम रोक लगाने के हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने मामले में हाईकोर्ट के 10 फरवरी के आदेश के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

यह हुई बहस

विज्ञापन

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई के पक्ष में आदेश होने के बावजूद जांच पर अंतरिम रोक लगाने की मंजूरी दे दी थी। वहीं, शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सीबीआई ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की है, लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ के बाद में दिए अंतरिम आदेशों को चुनौती देने से इनकार कर दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हस्तक्षेप नहीं करेगा और उसने सीबीआई को  हाईकोर्ट से मामले को सुलझाने का अनुरोध करने की अनुमति दे दी।

यह है मामला

गौरतलब है, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने एजेंसी को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज मामले में एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले वर्ष 2020 के हैं। अदालत ने पिछले दो वर्षों में जांच की प्रगति पर सीबीआई से भी जानकारी मांगी थी। अदालत ने एजेंसी से पूछा था कि वह अंतिम रिपोर्ट कब दाखिल करेगी। उच्च न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख तक कार्यवाही रोक दी थी और मामले को स्थगित कर दिया था।

आयकर विभाग ने 2017 में शिवकुमार के परिसरों में छापे मारे थे। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी थी। ईडी की जांच के आधार पर सीबीआई ने कर्नाटक सरकार से कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मंजूरी मांगी थी। यह मंजूरी 25 सितंबर 2019 को मिली और तीन अक्टूबर 2020 को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिवकुमार ने प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

भाजपा नेता की मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में बीती 13 जुलाई को मार्च के दौरान हुई भाजपा नेता की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने को कहा है। याचिका में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी या फिर सीबीआई द्वारा जांच कराई जाए। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि 'हाईकोर्ट संवैधानिक संस्थाएं हैं और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उन्हें काफी शक्तियां मिली हुई हैं। स्थानीय हाईकोर्ट इसकी निगरानी कर सकते हैं और अगर उन्हें लगता है कि स्थानीय पुलिस सही तरीके से काम नहीं कर रही है तो वह सक्षम अधिकारियों के साथ एसआईटी का गठन कर सकते हैं।'

विज्ञापन


लिंगराजू के हत्यारों को बरी करने के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी
सुप्रीम कोर्ट आरटीआई कार्यकर्ता व ‘महा प्रचंड’ अखबार के संपादक लिंगराजू की हत्या के सभी 12 आरोपियों को सबूतों की कमी का हवाला देते हुए बरी कर देने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। जस्टिस विक्रम नाथ व  जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने मामले में बरी किए गए लोगों को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा। राज्य की ओर से मामले में अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन पंवार और अधिवक्ता वीएन रघुपति उपस्थित हुए। कर्नाटक सरकार ने आरोपियों को बरी करने के हाईकोर्ट के 4 नवंबर, 2022 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।

लिंगराजू पर 20 नवंबर 2012 को उनके घर के पास तीन हथियारबंद लोगों ने उस समय हमला किया था। उनकी पत्नी उमा देवी ने शिकायत दर्ज की। इस पर पुलिस ने 12 के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। अपर नगर सिविल एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने आरोपियों को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी ने हाईकोर्ट में अपील की, जहां से सभी को बरी कर दिया था।

विपक्षी नेता ने ज्योतिरादित्य के खिलाफ दायर याचिका वापस ली
मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा चुनाव की वैधता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को वापस ले लिया है। सिंह ने सिंधिया पर आरोप लगाया था कि उन्होंने राज्यसभा के लिए दिए गए अपने नामांकन के साथ दिए शपथ पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी को छिपाया था।

लिहाजा, लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत उनके निर्वाचन को अवैध घोषित किया जाए। इस संबंध में सिंह ने पहले भोपाल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, भोपाल हाईकोर्ट ने इस संबंध में कई मुद्दों पर सवाल उठाते हुए सिंह की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने की मांग की थी।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें