इस्राइल को हथियारों निर्यात रोकने की मांग याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने गाजा में युद्ध लड़ रहे इस्राइल को हथियारों और सैन्य उपकरणों के निर्यात को रोकने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि वह देश की विदेश नीति के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर इस्राइल निर्यात पर रोक लगाने का आदेश दिया जाता है तो इस्राइल को हथियारों के निर्यात में शामिल भारतीय कंपनियों पर अनुबंध संबंधी दायित्वों के उल्लंघन के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।
जमीन के बदले वैकल्पिक भूखंड दे महाराष्ट्र सरकार: सर्वोच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने आज महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वे 24 एकड़ से अधिक वैकल्पिक भूमि का “शांतिपूर्ण एवं मुक्त” कब्जा एक ऐसे व्यक्ति को सौंप दें, जिसकी भूमि पर छह दशक से अधिक समय पहले “अवैध” कब्जा किया गया था।
शीर्ष अदालत ने वन एवं राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश कुमार की बिना शर्त माफी भी स्वीकार कर ली, जिनके खिलाफ न्यायालय ने 28 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि विभाग द्वारा दायर हलफनामे में की गई “अवमाननापूर्ण टिप्पणियों” के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। हलफनामे से ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वोच्च न्यायालय कानून का पालन नहीं करता है। कुमार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया, जिसे अदालत ने अवमाननापूर्ण पाया।
हलफनामे में कहा गया, “आवेदक के साथ-साथ न्यायालय भी कलेक्टर, पुणे द्वारा की गयी नयी गणना (आवेदक को मौद्रिक मुआवजा देने के लिए) को मंजूरी नहीं दे सकता है, लेकिन कानून के प्रावधानों का पालन करना और उचित गणना पर पहुंचना राज्य का कर्तव्य है।” कुमार ने अपने हलफनामे में कहा कि राज्य सरकार मुआवजे के तौर पर 48.65 करोड़ रुपये देने को तैयार है। हालांकि, आवेदक ने जोर देकर कहा कि जमीन का बाजार मूल्य 250 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बाद आवेदक ने मुआवजे के तौर पर जमीन का एक और टुकड़ा मांगा।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पुणे के कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि 24 एकड़ 38 गुंठा स्थानापन्न भूमि की माप की जाए, सीमांकन किया जाए और इसका “शांतिपूर्ण और मुक्त कब्जा आवेदक को सौंप दिया जाए”।