देश की सर्वोच्च अदालत को बुधवार को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, सीईसी ने राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य में निजी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही को लेकर चिंता व्यक्त की है। सीईसी ने इस बात पर जोर दिया है कि इससे वन्य जीवन को नुकसान पहुंच सकता है। सीईसी ने बताया है कि अभयारण्य के प्रसिद्ध पांडुपोल हनुमान मंदिर क्षेत्र में निजी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही हो रही है। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस बारे में राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार से इस संबंध में 11 सितंबर तक जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े एक फैसले पर पुनर्विचार के सवाल पर सुनवाई को 28 अगस्त के लिए टाल दिया। दरअसल, वर्ष 2022 में एक फैसला लिया था। इस फैसले के तहत शीर्ष अदालत ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्क करने की प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों को बरकरार रखा था। अब अदालत से एक याचिका में सवाल किया गया कि क्या उस फैसले पर पुनर्विचार हो सकता है? अदालत ने इस पर सुनवाई को 28 अगस्त तक के लिए टाल दिया। सुनवाई की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से अदालत के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता में तीन न्यायधीशों की पीठ से कहा कि उन्हें इस पर जवाब देने के लिए कुछ समय चाहिए। इसके बाद अदालत ने 28 अगस्त तक के लिए सुनवाई टाल दी।