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SC Updates: सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को भेजा नोटिस, 29 अप्रैल तक मांगा जवाब

Mon, 01 Apr 2024 12:16 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुयन की बेंच ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए एजेंसी से 29 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है। गौरतलब है कि सेंथिल को धनशोधन से जुड़े मामले में पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने इस मामले में हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 
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जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुयन की बेंच ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए एजेंसी से 29 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा। 

तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। मामले में सुनवाई करने के बाद फरवरी में मद्रास उच्च न्यायालय ने सेंथिल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। 

बीते साल जून में हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने बीते साल जून में ईडी ने वी. सेंथिल बालाजी को गिरफ्तार किया था। साल 2014 में परिवहन मंत्री रहते हुए बालाजी पर मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में पैसे लेकर लोगों को नौकरी देने के आरोप लगे थे। साथ ही आरोप है कि बालाजी ने मनी लॉन्ड्रिंग की थी।
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बालाजी की गिरफ्तार पर जमकर हंगामा हुआ था और गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। बालाजी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी दिल की सर्जरी की गई। इसके बाद 17 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सेंथिल बालाजी को तमिलनाडु की पुझल सेंट्रल जेल भेजा गया और तब से वे जेल में बंद हैं।

गिरफ्तारी के बाद भी बालाजी ने डीएमके कैबिनेट से इस्तीफा नहीं दिया था। हालांकि सीएम स्टालिन ने उनके विभागों ऊर्जा, एक्साइज को अन्य मंत्रियों को आवंटित कर दिया था। बिना किसी प्रभाव के बालाजी तमिलनाडु सरकार में मंत्री बने हुए थे। हालांकि कुछ दिन पहले ही बालाजी ने तमिलनाडु कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। 
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फर्जी मुठभेड़ मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख
मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने 2006 के फर्जी मुठभेड़ मामले में उन्हें दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट के मुताबिक, प्रदीप शर्मा ने 21 मार्च को वकील देविना सहगल के जरिए विशेष अनुमति याचिका दायर की है। गौरतलब है कि 19 मार्च को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गैंगस्टर छोटा राजन के कथित करीबी सहयोगी रामनारायण गुप्ता के फर्जी मुठभेड़ मामले में प्रदीप शर्मा को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही कोर्ट ने 2006 के मामले में 13 अन्य आरोपियों की सजा को भी बरकरार रखा था।
क्या है मामला
11 नवंबर 2006 को एक पुलिस टीम ने पड़ोसी नवी मुंबई के वाशी इलाके से रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया को उसके दोस्त अनिल भेड़ा के साथ उठाया और उसी शाम पश्चिमी मुंबई के वर्सोवा के पास एक फर्जी मुठभेड़ में उसे मार डाला था। 
 
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