मुफ्त रेवड़ियां...नई याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों की तरफ से विभिन्न तरह की सौगातों का वादा किए जाने के चलन के खिलाफ एक नई याचिका पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि राजनीतिक दलों को चुनावी सौगातों के वादे करने से रोकने के लिए निर्वाचन आयोग (ईसी) को प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने बंगलूरू निवासी शशांक जे. श्रीधारा की याचिका पर नोटिस जारी करने के साथ ही इस मामले को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ ही जोड़ दिया। याचिका में कहा गया है कि मुफ्त की रेवड़ियां बांटे जाने के बेलगाम वादे सरकारी राजकोष पर बेहिसाब वित्तीय बोझ डालते हैं। इसके अलावा, यह सुनिश्चित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है कि चुनाव पूर्व किए वादे पूरे किए जाएं।
मुफ्त उपहारों के वादों को रिश्वत घोषित करें
याचिका में राजनीतिक दलों के मुफ्त उपहारों के वादों को रिश्वत घोषित करने की मांग भी की गई है। इसमें कहा गया कि विधानसभा या आम चुनावों के दौरान राजनीतिक दल मुफ्त उपहारों, खासकर नगदी संबंधी वादे करने, जिन्हें उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर सरकारी खजाने से वित्तपोषित किया जाएगा, के लिए ऐसे राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 को रिश्वतखोरी का जिम्मेदार ठहराया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नया नोटिस जारी किया है। दरअसल, भारती पर राज्य में अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति पर कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। इस मामले में उन्होंने कोर्ट से अपने खिलाफ दर्ज केसों को स्थानांतरित करने की मांग की है।
भारती के खिलाफ एक मामला सुल्तानपुर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में है। उन्होंने इसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में ट्रांसफर करने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने इस मामले में शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई के लिए तीन हफ्ते बाद की तारीख तय की। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल तीन जुलाई को भारती के खिलाफ सुल्तानपुर अदालत में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इससे पहले पिछले साल 10 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर भारती द्वारा मामले को स्थानांतरित करने के अनुरोध वाली याचिका को लेकर कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
आप नेता की टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ रायबरेली और अमेठी में दो मामले दर्ज किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने एनटीएफ की तरफ से बैठकें न करने को लेकर असंतुष्टि जताई।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने पाया कि राष्ट्रीय कार्यबल की पहली बैठक 27 अगस्त को हुई थी। इसमें राज्यों में अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा सिस्टम और स्वास्थ्य कर्मियों की स्थिति सुधारने के अलावा कानूनों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई की 9 सितंबर के बाद से एनटीएफ की कोई बैठक नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर एनटीएफ ने 9 सितंबर के बाद क्या किया। आखिर किसी भी मामले में कोई प्रगति क्यों नहीं हुई। उन्हें काम को आगे बढ़ना चाहिए।
इसे लेकर सरकार का पक्ष रख रहे वकील तुषार मेहता ने कोर्ट को एफिडेविट में एनटीएफ के कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एनटीएफ के सामने काफी काम है और भरोसा दिया कि देश के स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याओं का जल्द हल खोज लिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि एनटीएफ की बैठकें समय-समय पर होती रहनी चाहिए।