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SC Updates: अधिवक्ताओं को एएफटी का न्यायिक सदस्य नियुक्त करने से जुड़ी याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा

Tue, 02 Jan 2024 07:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SC Updates: सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 को संसद की ओर से सेना अधिनियम, नौसेना अधिनियम और वायु सेना अधिनियम के तहत कमीशन, नियुक्ति, नामांकन और सेवा की शर्तों के संबंध में विवादों और शिकायतों पर निर्णय लेने की शक्ति के साथ निकायों की स्थापना के लिए पारित किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) में अनुभवी वकीलों को न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने गुरुग्राम निवासी ईशान गिल की याचिका पर संज्ञान लिया और कहा कि वह ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकती। 

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पीठ ने कहा, ''आपकी याचिका गलत है। हम यह नहीं कह सकते कि केवल अनुभवी अधिवक्ताओं को नियुक्त करें। हम सभी इस बात पर सहमत हैं। इसलिए याचिका को खारिज किया जाता है।" सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 को संसद की ओर से सेना अधिनियम, नौसेना अधिनियम और वायु सेना अधिनियम के तहत कमीशन, नियुक्ति, नामांकन और सेवा की शर्तों के संबंध में विवादों और शिकायतों पर निर्णय लेने की शक्ति के साथ निकायों की स्थापना के लिए पारित किया गया था।

एएफटी तीनों बलों को संचालित करने वाले तीन कानूनों के तहत कोर्ट-मार्शल के आदेशों, निष्कर्षों या सजा से उत्पन्न अपीलों की सुनवाई भी करता है। नई दिल्ली में प्रधान पीठ के अलावा, एएफटी की चंडीगढ़, लखनऊ, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई, कोच्चि, मुंबई, जबलपुर, श्रीनगर और जयपुर में क्षेत्रीय बेंच हैं। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों को एएफटी के न्यायिक सदस्यों के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त सदस्य जिन्होंने तीन साल या उससे अधिक की अवधि के लिए मेजर जनरल/समकक्ष या उससे ऊपर का पद धारण किया है, उन्हें एएफटी के प्रशासनिक सदस्यों के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

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सेवा से हटाई गई ट्रांसजेंडर शिक्षिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर शिक्षिका की उस याचिका पर सुनवाई के लिए हामी भर दी, जिनकी सेवा गुजरात और उत्तर प्रदेश के अगल-अलग निजी स्कूलों ने लैंगिक पहचान उजागर होने के बाद समाप्त कर दी गई थी। याचिकाकर्ता ने अपने मौलिक अधिकारों को बहान करने की मांग की है।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी परदीवला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने ट्रांसजेंडर महिला की याचिका पर केंद्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस मामले में कोर्ट देखेगी कि क्या किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में गुजरात के जामनगर स्थित स्कूल के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के खीरी स्थित एक अन्य निजी स्कूल के अध्यक्ष से भी जवाब मांगा है। पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की शिकायत यह है कि उसकी लैंगिक पहचान उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश और गुजरात के स्कूलों में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह दो अलग-अलग हाईकोर्ट में शिकायत नहीं कर सकती।’’

कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए चार हफ्ते बाद की तारीख मुकर्रर की है। ट्रांसजेंडर महिला की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश के एक स्कूल की ओर से उनकी मुवक्किल को नियुक्ति पत्र दिया गया था और हटाए जाने से पहले उन्होंने छह दिन तक सेवा भी दी थी। वकील ने कहा कि गुजरात के स्कूल की ओर से भी नियुक्ति पत्र दिया गया, लेकिन मुवक्किल की लैंगिक पहचान उजागर होने के बाद उन्हें कार्य शुरू ही नहीं करने दिया गया।

हिमाचल डीजीपी पद से हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आईपीएस संजय कुंडू
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू ने उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद से हटाए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर मंगलवार को कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी। 

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने मंगलवार को कुंडू की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की दलीलों पर संज्ञान लिया। इसके बाद पीठ याचिका पर बुधवार को मामले पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई।

कुंडू का पक्ष रखते हुए रोहतगी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारी की दलील नहीं सुनी और 26 दिसंबर को राज्य सरकार को उन्हें अन्य पद पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 26 दिसंबर को राज्य सरकार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को हटाने का निर्देश दिया था, ताकि वे एक कारोबारी की जान को खतरे संबंधी शिकायत की जांच को प्रभावित न कर सकें। इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने कुंडू को स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया था। उन्हें आयुष विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात किया गया।

मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के पुनर्वास से जुड़ी याचिका पर केंद्र से मांगा गया जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम ऐसे लोगों के पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर मंगलवार को केंद्र और अन्य से जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने पूर्व पत्रकार के एसआर मेनन की याचिका पर संज्ञान लिया जिसमें ऐसे लोगों को देखभाल सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक नीति या दिशानिर्देश तैयार करने का अनुरोध किया गया है। लॉ फर्म केएमएनपी लॉ एओआर के माध्यम से दायर जनहित याचिका में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के एक प्रावधान का उल्लेख किया गया है जो "देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों" से संबंधित है।
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लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए आरणक्ष को लेकर याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें इस साल लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी कोटा सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण कानून को तत्काल और समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की गई है। अधिवक्ता योगमाया एमजी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 2024 में आगामी आम चुनावों में नए कानून को समय पर लागू करने की तत्काल आवश्यकता है।

उन्होंने कहा,'महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को इसके क्रियान्वयन में अनिश्चितता के साथ पारित किया गया था। याचिकाकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए इस अदालत के दखल देने की मांग करता है कि महिलाओं के लिए उचित प्रतिनिधित्व के संवैधानिक जनादेश को तेजी से पूरा किया जाए।'

आधिकारिक तौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में जाना जाने वाला यह कानून महिलाओं के लिए लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। हालांकि, कानून को तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। यह एक नई जनगणना के बाद लागू होगा, जिसके आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए परिसीमन किया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि कि इसे लागू करने में किसी भी तरह की देरी लोकतंत्र के सिद्धांतों से समझौता करेगी।
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