दिल्ली आबकारी नीति में अनियमितता के मामले में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बीआरएस नेता के. कविता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 22 मार्च को सुनवाई करेगा।
दिल्ली शराब घोटाले में गिरफ्तार बीआरएस नेता के कविता ने अपनी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। के कविता ने साथ ही रिमांड ऑर्डर के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में कविता ने कहा कि रिमांड का आदेश संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार नहीं है, जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून सभी राज्यों की अदालतों के लिए भी बाध्यकारी होगा। के कविता ने पीएलएलए कानून की धारा 19(1) को भी चुनौती दी है।
क्या हैं के. कविता पर आरोप
ईडी का दावा है कि के कविता ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ मिलकर कथित तौर पर साजिश रची। जिसके तहत दिल्ली शराब नीति में फायदा पाने के लिए आप नेताओं को करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। के कविता को कथित दक्षिण लॉबी का हिस्सा बताया जा रहा है। दिल्ली शराब नीति मामले में ईडी अब तक देशभर में 245 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है और मनीष सिसोदिया, संजय सिन्हा और विजय नायर समेत 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने एक और मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड के लिए 3000 करोड़ रुपये रिलीज नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए सबसे बड़ी अदालत का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और एक अप्रैल को इस पर सुनवाई होगी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि 31 मार्च को लैप्स हो जाने के बावजूद उसकी ओर से फंड रिलीज करने का आदेश दिया जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को आश्वासन दिया कि वह दिल्ली जल बोर्ड को दी जाने वाली 3,000 करोड़ रुपये की धनराशि 31 मार्च को व्यपगत होने के बाद भी जारी करने का आदेश दे सकता है।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग करने वाली याचिका का उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि वह एक अप्रैल को याचिका पर सुनवाई करेगी। जब सिंघवी ने इस बात पर जोर दिया कि मामले की सुनवाई 21 मार्च को की जाए तो प्रधान न्यायधीश ने कहा कि मामले की सुनवाई एक अप्रैल को सूचीबद्ध करेंगे और यदि हम कुछ होता है तो निर्णय को पलटा जा सकता है, इसमें कोई समस्या नहीं है।
वरिष्ठ वकील ने कहा कि बजट विधिवत पारित किया गया था और फिर भी दिल्ली जल बोर्ड के लिए निर्धारित धनराशि जारी नहीं की जा रही है और इसके परिणामस्वरूप निधि की कमी हो सकती है।
क्या है जल बोर्ड घोटाला
प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि दिल्ली जल बोर्ड का ठेका बढ़ी हुई दरों पर दिया गया। ताकि ठेकेदारों से रिश्वत वसूली जा सके। ठेके का मूल्य 38 करोड़ रुपये था और इस पर सिर्फ 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए और शेष राशि गबन कर ली गई। इस तरह के फर्जी खर्च रिश्वत और चुनावी कोष के लिए किए गए थे। कथित तौर पर जल बोर्ड के पूर्व मुख्य अभियंता जगदीश कुमार अरोड़ा ने एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को 38 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
यह ठेका इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फ्लो मीटर्स की आपूर्ति, स्थापना और परीक्षण के लिए दिया गया था। इस मामले में आरोप लगाया गया है कि बोर्ड और एनबीसीसी के अधिकारियों ने रिश्वत के लिए एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर का पक्ष लिया। ईडी ने इस मामले में गत 31 जनवरी को जगदीश कुमार अरोड़ा और ठेकेदार अनिल कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार किया था।
उधर ईडी ने मामले से जुड़ी मनी ट्रेल की जांच करते हुए आरोप लगाया है कि एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर को अनुबंध दिए जाने के बाद अरोड़ा को नकद और बैंक खाते में रिश्वत प्राप्त हुई थी। यह पैसा अलग-अलग पार्टियों को देने का आरोप लगाया गया। वहीं आम आदमी पार्टी को चुनावी फंड के तौर पर भी पैसा दिया गया। बीते दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक विभव कुमार, आम आदमी पार्टी के कोषाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद एनडी गुप्ता और अन्य लोगों के यहां छापेमारी की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हैदराबाद के कारोबारी अभिषेक बोइनपल्ली को पांच सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। अभिषेक को कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने बोइनपल्ली को उनकी पत्नी तबियत सही नहीं होने के कारण अंतरिम जमानत दी है।
पीठ ने कहा कि कारोबारी 18 महीने से हिरासत में है। साथ ही उनसे प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को एक फोन नंबर देने को कहा है जिससे वे उनके संपर्क में रह सकें। पीठ ने वाड्रा को अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी आदेश दिया कि वह हैदराबाद से बाहर न जाएं।
शीर्ष अदालत ने बोइनपल्ली की जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के तीन जुलाई, 2023 के आदेश को भी चुनौती दी है जिसने नौ अक्टूबर, 2022 को उनकी गिरफ्तारी की वैधानिकता पर सवाल खड़ा करने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
तमिलनाडु में गिरफ्तार ईडी अधिकारी को सुप्रीम राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी अंकित तिवारी को अंतरिम जमानत दे दी है।
जस्टिस सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की पीठ ने उन्हें राहत दी। इस दौरान पीठ ने कहा कि वह मामले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे या उन्हें प्रभावित नहीं करेंगे। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि वह शीर्ष अदालत की पूर्व अनुमति के बिना तमिलनाडु नहीं छोड़ेंगे और अपना पासपोर्ट जमा कर देंगे।
शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें जमानत देने से इनकार करने के खिलाफ तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। गौरतलब है कि अंकित तिवारी को तमिलनाडु सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने कथित रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कैग से अरुणाचल प्रदेश में सीएम के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने की जांच करने को कहा
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने की जांच करने के लिए आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने यह आदेश दिया। उन्होंने यह आदेश एनजीओ वॉलंटरी अरुणाचल सेना द्वारा 2010 में दायर याचिका पर दिया। इस याचिका में खांडू के रिश्तेदारों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की गई थी। उनपर आरोप लगाया गया था कि चावल वितरण सहित सरकारी ठेके मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों की फर्मों को दिए गए थे।
जमानत आदेशों के त्वरित पालन के लिए 'फास्टर सेल' तक पहुंच बनाएं जेल अधिकारी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने जमानत आदेशों के त्वरित अनुपालन के लिए 'फास्टर सेल' के जरिये आदेशों तक पहुंच बनाने के जेल अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने ये निर्देश जेल अधिकारियों के जमानत आदेशों को लागू न करने को देखते हुए दिए।
अमल में देरी से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से अदालती आदेशों के त्वरित और सुरक्षित प्रसारण के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने मार्च 2022 में फास्ट एंड सिक्योर्ड ट्रांसमिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स (फास्टर) सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था। जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि इस अदालत की ओर से कई जमानत आदेश पारित किए जा रहे हैं, जिन्हें जेल अधिकारियों को लागू करने की आवश्यकता है। जेल अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे अदालत के पारित आदेशों पर कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि आरोपी को इस अदालत के आदेश के अनुसार संबंधित अदालत में पेश किया जाए।
शीर्ष अदालत ने वकील स्मरहर सिंह के माध्यम से दायर एक विविध आवेदन पर आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता लक्ष्मण राम को 5 फरवरी को एक आपराधिक मामले में जमानत दिए जाने के बावजूद जेल अधिकारियों की ओर से रिहा नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने लक्ष्मण राम को सात दिनों में ट्रायल कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत के 16 फरवरी को आवेदन पर सुनवाई के लिए सहमत होने से पहले, लक्ष्मण राम को जेल से रिहा कर दिया गया। 16 फरवरी को पीठ ने कहा कि इस तथ्य के बावजूद कि संबंधित व्यक्ति को रिहा कर दिया गया, ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोपी को पेश करने में देरी के संबंध में उठाए गए मुद्दे पर विचार करना होगा।
चुनावी रेवड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
सुप्रीम कोर्ट चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की तरफ से मुफ्त में तमाम सुविधाएं देने की घोषणा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। शीर्ष अदालत से लोकसभा चुनाव से पहले इस मामले में सुनवाई करने का आग्रह किया गया था। जनहित याचिका में मुफ्त चुनावी रेवड़ियों की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिह्न जब्त करने और उनका पंजीकरण रद्द करने की भी मांग की गई है। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, यह महत्वपूर्ण है। हम इसे कल बोर्ड पर रखेंगे। पीठ ने याचिकाकर्ता वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय की तरफ से पेश वकील विजय हंसारिया की इस दलील पर गौर किया कि लोकसभा चुनाव से पहले इस याचिका पर सुनवाई किए जाने की आवश्यकता है।