छात्रसंघ चुनाव लड़ने की संख्या सीमित करने के खिलाफ याचिका पर नोटिस
पदाधिकारी और कार्यकारी पदों के लिए छात्रसंघ चुनाव लड़ने की संख्या सीमित करने के खिलाफ एक उम्मीदवार की तरफ से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र एवं अन्य को नोटिस जारी किया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लिंगदोह समिति की रिपोर्ट के नियम 6.5.6 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 28 नवंबर, 2006 को जारी एक अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई थी।
रिश्वत मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की ईडी की मांग पर सुनवाई दो हफ्ते टली
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारी अंकित तिवारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच तमिलनाडु के डीवीएसी से सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग वाली प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई सोमवार को स्थगित कर दी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी और तमिलनाडु सरकार से मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। दिसंबर में, तमिलनाडु, सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया था। उसे एक डॉक्टर से 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
मतदाता सूची में दोहराव पर आयोग के जवाब के बाद बंद किया मामला
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में नामों के दोहराव पर निर्वाचन आयोग की दलीलों पर ध्यान देने के बाद उत्तर प्रदेश से संबंधित एक जनहित याचिका में कार्यवाही बंद कर दी। शीर्ष अदालत ने 5 फरवरी को जनहित याचिका याचिकाकर्ता एनजीओ ‘संविधान बचाओ ट्रस्ट’ के उठाए दो मुद्दों पर आयोग से जवाब मांगा था, जिसमें दावा किया गया था कि मतदाता सूची दोषपूर्ण थी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष आयोग के वकील अमित शर्मा ने कहा, आयोग ने अपने जवाब में याचिकाकर्ता के उठाए गए दोनों सवालों का जवाब दिया है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के संचार का हवाला दिया है। उस संचार में डुप्लिकेट प्रविष्टियों का संदर्भ था। वकील ने कहा, उचित प्रक्रिया अपनाए बिना किसी भी मतदाता का नाम नहीं काटा जा सकता। इसके अलावा, मतदाता सूची अधिकारियों के आदेश के खिलाफ अपील का भी प्रावधान है। मामले को बंद करते हुए पीठ ने कहा कि आयोग ने एक व्यापक हलफनामा दायर किया है, जिसमें उन मतदाताओं के नाम दर्ज करने के चरणों की व्याख्या की गई है जो स्थानांतरित हुए हैं या जनसांख्यिकीय रूप से स्थानांतरित हो गए हैं।
शीर्ष कोर्ट ने तमिलनाडु फुटबाल संघ पदाधिकारियों पर लगाया 50 हजार का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेवजह मुकदमेबाजी पर सार्वजनिक धन खर्च करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु फुटबाल संघ की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने नए प्रशासनिक पैनल की नियुक्ति तक फुटबाल निकाय के मामलों को देखने के लिए समिति बनाने का आदेश दिया था।
जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने फुटबाल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की आलोचना करते हुए याचिका को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। शीर्ष कोर्ट ने संघ के अध्यक्ष जेसिया विलावरयार समेत अन्य पदाधिकारियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीठ ने स्पष्ट किया, पदाधिकारी जुर्माने की रकम संघ से नहीं लेंगे। यह रकम सुप्रीम कोर्ट मध्य आय समूह कानूनी सहायता सेवा के पास जमा की जाएगी।
पीठ ने संघ के वकील से कहा, समस्या यह है कि आप अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं कर रहे, इसलिए आपको मुकदमेबाजी का दर्द नहीं पता है। आप जनता का पैसा खर्च कर रहे हैं। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया, सदस्य लागत राशि जमा नहीं करें, तो मामले को अवमानना याचिका के रूप में सूचीबद्ध किया जाए।