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Supreme Court: 'न्यायपालिका को संविधान की व्याख्या करने की अनुमति हो', जस्टिस कोहली ने कही ये बड़ी बात

Sun, 05 Mar 2023 09:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

जस्टिस कोहली ने कहा, न्यायपालिका को संविधान की व्याख्या करने के साथ ही केवल संविधान और कानूनों के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति भी दी जानी चाहिए।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस हिमा कोहली ने न्यायपालिका को संविधान की व्याख्या करने की अनुमति देने की वकालत की है। शनिवार को कोलकाता में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सिर्फ कानूनी सिद्धांत भर नहीं है, बल्कि जीवंत लोकतंत्र का मूलभूत स्तंभ है। वह कोलकाता में फिक्की की ओर से ‘स्वतंत्र न्यायपालिका : एक जीवंत लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण’विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रही थीं।

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जस्टिस कोहली ने कहा, न्यायपालिका को संविधान की व्याख्या करने के साथ ही केवल संविधान और कानूनों के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति भी दी जानी चाहिए।

यही वह व्याख्या है जो संविधान के लिए एक जीवित दस्तावेज बने रहने की गारंटी देती है जो अपने मूलभूत मूल्यों और सिद्धांतों में निहित रहते हुए समय के साथ विकसित होता रहता है।

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उन्होंने कहा, यह आवश्यक है कि लोकतांत्रिक प्रणाली को ताकत देने के लिए तीनों स्तंभ (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) समानांतर अवस्था में काम करें, एक साथ और हाथ में हाथ मिलाकर नहीं। यह स्वयं न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संरक्षित और इसकी स्वायत्तता और निष्पक्षता की रक्षा करेगा। सांविधानिक संवाद में न्यायपालिका की भूमिका को मान्यता देना भी उतना ही आवश्यक है क्योंकि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए यह सुरक्षा वाल्व की तरह करती है।
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इस दौरान उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और कहा कि न्यायपालिका, कानून के शासन को बनाए रखकर और यह सुनिश्चित करके लोकतांत्रिक संस्थानों की स्थिरता और प्रभावकारिता को बढ़ावा देता है कि सरकार अपने दायरे में काम करे।

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