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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समझ आएगा क्या होता है "डू नॉट डिस्टर्ब"

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निजता क्या है और उसकी सरहद क्या होनी चाहिए, इस सवाल पर देश में पिछले 50 वर्षों से बहस चल रही है। विशेषज्ञों ने आधार कार्ड को निजता का हनन माना तो किसी ने कहा खान-पान से लेकर जिंदगी से जुड़े फैसलों पर भी सरकार नजर रख सकती है।   
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पढ़ें:'राइट टू प्राइवेसी' पर SC का बड़ा फैसला, कहा- ये आपका मौलिक अधिकार

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों वाली संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया, साथ ही बेंच ने ये भी कहा कि निजता की सीमा तय की जा सकती है। 

इस बेंच द्वारा दिए गए फैसले का प्रभाव हर किसी की जिंदगी पर तो पड़ेगा ही साथ ही सरकार और नागरिकों के बीच के रिश्तों को पारिभाषित करने वाला होगा। जिसे आने वाले दशकों तक आम जनता के मौलिक अधिकारों को समझा जाएगा।
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पढें:'निजता' है मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जानिए आए कैसे ‌रिएक्शंस
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हमारी जिंदगी पर पड़ेगा प्रभाव

फोन के मामले में डू नॉट डिस्टर्ब की योजनाएं पहले से ही लागू हैं। मोबाइल कंपनियां फोन डिटेल्स कॉल सेंटर कंपनियों को बेच देती हैं उसपर रोक लगेगी। अनचाहे फोन कॉल पर रोक लगेगी। तय सीमा से अधिक की ज्वैलरी  खरीदारी करने पर रोक लग सकती है।

महंगा फर्नीचर, टेलीविजन, घर का सामान, महंगी घड़ियां, घूमने फिरने के दौरान मांगी जाने वाली जानकारियां देना या न देना हमारा अधिकार होगा। अब किसी का फोन टेप करने से पहले सक्षम कानूनी अधिकारी से अनुमति लेनी होगी..क्योंकि यह नागरिक का मौलिक अधिकार होगा।
 
सरकारी योजनाओं के साथ-साथ बैंकिंग, मोबाइल सिम खरीद, क्रेडिट कार्ड जैसी तमाम सुविधाओं को जिस तरह से आधार से जोड़ने और सरकार कनसेंट्रेशन कैंप (एकल निगरानी तंत्र) जैसी व्यवस्था लागू करना चाहती है इस व्यवस्था पर भी रोक लग सकती है। 

बैंक डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड को आधार से जोडऩे के बाद सरकार को यह मालूम करना बेहद आसान होता कि अमुक व्यक्ति ने किस मॉडल का टीवी खरीदा है और किस रेस्त्रां में किस वक्त क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया है। इस पर रोक लग सकती है।
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