राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आतंकवाद से जुड़े ऐसे पांच मामलों की जांच कर रही है, जिसमें तथाकथित रूप से हिंदू आतंकवाद का नाम लिया जा रहा है। दरअसल, मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में लगभग 9 साल जेल में गुजारने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित रिहा हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पुरोहित को जमानत पर रिहा कर दिया है।
हालांकि उनकी रिहाई पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने आरोप लगाए हैं कि भारतीय जनता पार्टी के हिंदूत्व के एजेंडे का फायदा पुरोहित को मिला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि भाजपा आएसएस के उन तमाम आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है जो बम धमाकों में शामिल रहे हैं।
आइए आपको उन मामलों के बारे में बताएं, जिनकी जांच एनआईए कर रही हैः
1. मालेगांव ब्लास्ट केस (2006)
29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
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2. समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट
2005 के समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादात्तर पाकिस्तानी नागरिक थे। यह ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी। इस मामले में एनआई ने आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। जिसमें से एक की मौत हो चुकी है।