लोकसभा से निष्कासन के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा महासचिव से जबाव मांगा है। हालांकि, अंतरिम राहत पर विचार करने से इन्कार कर दिया। महुआ पर अदाणी समूह से संबंधित सवाल पूछने के लिए दुबई स्थित एक कारोबारी के साथ अपने लॉगिन विवरण साझा करने का आरोप था। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि वह अधिकार क्षेत्र और न्यायिक समीक्षा की शक्ति सहित सभी मुद्दों की जांच करेगी। कई मुद्दे उठाए गए हैं और वह इस स्तर पर किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगी।
शीर्ष अदालत ने लोकसभा के महासचिव की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी और मामले पर विचार के लिए 11 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए रख दिया। मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से उन्हें लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति देने का आग्रह किया। इस पर पीठ ने कहा कि हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते।
गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा को पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में शीत सत्र के दौरान लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। मोइत्रा ने उनके निष्कासन की सिफारिश करने वाली लोकसभा की आचार समिति पर पर्याप्त सबूत के बिना फैसले लेने और मनमानी का आरोप लगाया है। महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में अयोग्यता को चुनौती देने के साथ आचार समिति के निष्कर्षों पर चर्चा के दौरान लोकसभा में खुद का बचाव करने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही है।