सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मां का ध्यान रखने के लिए घर नहीं दिल बड़ा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेटे को अपनी 89 वर्ष की मां की संपत्ति बेचने से रोकने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की। मां डिमेंशिया (याददाश्त से जुड़ा रोग) की एडवांस स्टेज में हैं। उन्हें बोलने या संकेत से बात करने पर भी कुछ समझ नहीं आता। कोर्ट ने कहा, आप अपनी मां की संपत्ति में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। देश के वरिष्ठ नागरिकों के साथ यही त्रासदी है।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत ने पाया कि गंभीर बीमारी के बीच भी बेटा मां को बिहार के मोतिहारी ले गया, ताकि रजिस्ट्रार ऑफिस में उनके अंगूठे का निशान लेकर 2 करोड़ की संपत्ति बेच सके। मामले से संबंधित वैदेही सिंह के चार बेटे और दो बेटियां हैं। सबसे बड़े बेटे कृष्णकुमार सिंह ने उन्हें अपने पास रखा हुआ है। उनकी मुश्किल परिस्थिति देखते हुए बेटियों पुष्पा तिवारी और गायत्री कुमार ने उनकी देखभाल करने का प्रस्ताव दिया।
बेटियों ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वे 2019 से मां की देखभाल कर रहीं थीं और आगे भी करेंगी। बहनों ने आरोप लगाया कि कृष्ण कुमार उन्हें मां से मिलने नहीं देते। सुप्रीम कोर्ट में कृष्ण कुमार की ओर से वकील ने कहा कि उनकी बहन नोएडा में केवल 2 बेडरूम फ्लैट में रहती है। वहां मां को रखने में दिक्कत होगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जगह कितनी बड़ी है, इससे फर्क नहीं पड़ता। दिल कितना बड़ा है, यह महत्व रखता है।
मां से मिलने से नहीं रोक सकते भाई-बहनों को
अगली सुनवाई 17 मई को रखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिए कि अगले आदेश तक वैदेही सिंह की संपत्ति बेचने को लेकर कोई डील नहीं होगी। साथ ही मां से मिलने से अपने भाई-बहनों को भी नहीं रोकें।