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Supreme Court: पवन खेड़ा और राघव चड्ढा के मामले पर सोमवार को सुनवाई, तूतीकोरिन प्लांट मामले में नवंबर में जिरह

Sun, 15 Oct 2023 05:41 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

असंसदीय आचरण के आरोपी आप सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा से अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर राघव की याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी। इसके अलावा भी कई बड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। जानिए कुछ प्रमुख मामले
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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संसद से निलंबित किए जा चुके आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। राज्यसभा से अनिश्चितकाल के लिए निलंबन के खिलाफ दायर राघव चड्ढा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ में राघव के मामले की सुनवाई होगी।
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संसद की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट का इंतजार
उच्चतम न्यायालय में निलंबन को चुनौती देने वाली सांसद राघव चड्ढा की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ सुनवाई करेगी। आम आदमी पार्टी के सांसद पर विगत 11 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन असंसदीय आचरण करने का आरोप लगा है। "नियमों के घोर उल्लंघन, कदाचार, अभद्र रवैये और अवमाननापूर्ण आचरण" के लिए निलंबित किए गए राघव के मामले में संसद की विशेषाधिकार समिति की एक रिपोर्ट भी लंबित है।

दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती
वकील शादान फरासत के माध्यम से दायर याचिका में आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा, अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने की शक्ति खतरनाक रूप से इस्तेमाल की गई है। उन्होंने इसके दुरुपयोग की आशंका भी जाहिर की है। उन्होंने कहा, ''निलंबित करने की शक्ति का उपयोग केवल ढाल के रूप में किया जाना है, न कि तलवार के रूप में। यह दंडात्मक नहीं हो सकती है।'' 
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सांसद को निलंबित करना बेहद अतार्किक उपाय
राघव ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्यसभा से निलंबन सदन संचालन नियमावली के नियम 256 का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलों में कहा है कि राज्यसभा से किसी भी सदस्य को सत्र से अधिक समय तक या अनिश्चितकाल के लिए निलंबित नहीं किया जा सकता। चालू संसद सत्र की शेष अवधि से अधिक समय तक किसी सांसद को निलंबित करना बेहद अतार्किक उपाय है। ये भी महत्वपूर्ण है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों का भी उल्लंघन होगा। 

गोयल के प्रस्ताव पर निलंबन
याचिका में कहा गया है कि निलंबन का प्रभाव बर्खास्तगी जैसा नहीं हो सकता, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 101(4) के अनुसार, अनिश्चितकालीन निलंबन का बुरा प्रभाव होता है। ऐसी कार्रवाई के कारण 60 दिन की अवधि के बाद भी पद खाली पड़ा रहता है। बता दें कि 11 अगस्त को राज्य सभा के नेता पीयूष गोयल ने आप सांसद राघव के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पेश किया था। ध्वनि मत से पारित प्रस्ताव के बाद राघव को निलंबित करने की कार्रवाई की गई।

गृह मंत्री शाह के सामने की घटना
गौरतलब है कि राघव पर राज्य सभा के कई सदस्यों के नाम बिना उनकी सहमति के संसदीय समिति में शामिल करने का प्रयास करने का आरोप है। मामला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर एक चयन समिति बनाने का है। खुद गृह मंत्री शाह भी सदन में मौजूद थे और उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के मामले पर भी सुनवाई

राघव की याचिका के अलावा सुप्रीम कोर्ट में एक और अहम मामले की सुनवाई होनी है। पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी के इस मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की याचिका पर न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ सुनवाई करेगी। खेड़ा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे खेड़ा
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में खेड़ा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही लंबित है। उन्होंने इस कार्रवाई को रद्द करने के की अपील की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला 13 अक्टूबर को भी सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन खेड़ा के वकील ने कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति मांगी थी। 

असम और यूपी में प्राथमिकी
गौरतलब है कि इसी साल 20 मार्च को, शीर्ष अदालत ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में तीन प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ दिया था। असम और उत्तर प्रदेश में खेड़ा के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर को जोड़ने के अलावा अदालत ने अंतरिम जमानत की अवधि भी बढ़ा दी थी। अदालत के निर्देश पर मामले को लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया था।

एयरपोर्ट से गिरफ्तारी, अंतरिम जमानत पर बाहर हैं खेड़ा
खेड़ा को लखनऊ कोर्ट से जमानत भी मिली थी। कथित टिप्पणी के लिए खेड़ा ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगी है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को 23 फरवरी को दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें रायपुर जाने वाले विमान से उतार दिया गया था। नाटकीय घटनाक्रम के बीच खेड़ा को उसी दिन शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत भी मिल गई थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।

तमिलनाडु के स्टरलाइट प्लांट मामले में सुनवाई

राघव चड्ढा और पवन खेड़ा के मामलों के अलावा, सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट कॉपर यूनिट को बंद करने से संबंधित मामला भी लंबित है। शीर्ष अदालत में वेदांता समूह की याचिका 29 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है। 9 अक्टूबर को, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि याचिका पर सुनवाई के लिए "दो समर्पित तिथियां" आवंटित होंगी।

कंपनी को SC से मिले अहम निर्देश
शीर्ष अदालत ने इसी साल मई में वेदांत समूह को तूतीकोरिन में अपनी स्टरलाइट कॉपर इकाई का रखरखाव स्थानीय निगरानी समिति की देखरेख में करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 10 अप्रैल के आदेश में संयंत्र में बाकी बचे जिप्सम को निकालने और कंपनी के अनुरोध के अनुसार आवश्यक जनशक्ति उपलब्ध कराने की अनुमति भी दी थी।

क्या है तमिलनाडु का पूरा मामला
22 मई, 2018 को कम से कम 13 लोग मारे गए और कई घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने कथित तौर पर पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों की भारी भीड़ पर गोलियां चला दीं। तांबा गलाने वाली इकाई के कारण प्रदूषण के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन हुआ था। तमिलनाडु सरकार ने 28 मई, 2018 को प्रदूषण संबंधी चिंताओं पर हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद संयंत्र को सील करने और "स्थायी रूप से" बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खनन समूह की इकाई पर ताला लटका दिया।
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