राघव चड्ढा की याचिका पर सुनवाई 8 दिसंबर तक के लिए स्थगित करने का फैसला चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत में हुई। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष राज्यसभा सचिवालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस मामले में "कुछ रचनात्मक प्रगति" की संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अदालत इस मामले की सुनवाई बाद में कर सकती है, तो कई मुद्दों पर विचार करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इस मामले के बारे में कुछ न कहें... बस इंतजार करें। आइए एक समाधान निकालें।" इस टिप्पणी के साथ पीठ ने याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख आठ दिसंबर तय की।
सुप्रीम कोर्ट में राघव चड्ढा की तरफ से अदालत में पेश हुए वकील शादान फरासत ने राज्यसभा सांसद के आधिकारिक बंगले से बेदखली की नोटिस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आप सांसद को सुरक्षा दिए जाने की मांग भी की। पीठ ने राज्यसभा की पैरवी कर रहे वकील मेहता से इस मुद्दे पर गौर करने को कहा।
बेदखली नोटिस से जुड़े एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि आप सांसद के निलंबन के आधार पर, ऐसा नहीं होगा। बता दें कि बेदखली मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 अक्तूबर को, चड्ढा को उनके सरकारी बंगले में रहने की अनुमति दे दी थी। हाईकोर्ट ने शहर के प्रमुख स्थान पर आवंटित आवास से बेदखल करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के फैसले ने चड्ढा को बंगले से बेदखल करने का रास्ता साफ कर दिया था।
इससे पहले, पीठ ने निलंबन के खिलाफ चड्ढा की याचिका पर सुनवाई 1 दिसंबर तक के लिए टाल दी थी। बीते 3 नवंबर को, शीर्ष अदालत ने राघव चड्ढा को राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ से चयन समिति विवाद पर बिना शर्त माफी मांगने को कहा था। अदालत ने कहा था कि सभापति इस मामसे पर "सहानुभूतिपूर्वक" विचार कर सकते हैं।
बता दें कि राघव चड्ढा बीते 11 अगस्त से ही निलंबित हैं। सभापति ने कुछ सांसदों के प्रस्ताव पर कार्रवाई की थी। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने उनकी सहमति के बिना एक प्रस्ताव में अपना नाम जोड़ने का आरोप लगाया था। इस प्रस्ताव में विवादास्पद दिल्ली सेवा विधेयक की जांच के लिए एक चयन समिति के गठन की मांग की गई।