फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: शीर्ष कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- मोटर दुर्घटना में मुआवजे के लिए मृतक की आय पर गौर करना जरूरी

Sun, 11 Sep 2022 10:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ दो अपील की सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि कम कर दी थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना के मामलों में मुआवजे को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने उदार रुख अपनाते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में मुआवजा देते समय मृतक की कमाई के लिहाज से सुदृढ़ (मजबूत) नजरिया अपनाना चाहिए। खासकर तब जब वह खेती करने वाला एक किसान हो या काम करने वाला एक कुशल श्रमिक है।

विज्ञापन


केरल हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ दो याचिका की सुनवाई 
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ दो अपील की सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि कम कर दी थी। मामले में एमएसीटी ने 30 जनवरी 2017 को अनानास की खेती करने वाले मृतक के परिजनों को 26.75 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। एमएसटी ने उसकी मूल आय 12,000 रुपये प्रति माह को इसका आधार माना, लेकिन हाईकोर्ट ने एमएसीटी द्वारा गणना की गई आय को 12,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया।

पहला मामला: मृतक अनानास की खेती करने वाला किसान
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में मृतक अनानास की खेती करने वाला किसान था। दुर्घटना एक अक्तूबर 2015 को हुई थी। ऐसे मामलों में कमाई की मात्रा पर सुदृढ़ नजरिया अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसके दस्तावेजी सबूत उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। विशेष रूप से एक खेती करने वाले कृषक की कमाई को साबित करने के लिए।
विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट ने हाल ही में अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में कहा कि उसके विचार में एमएसीटी द्वारा अपनाई गई 12,000 रुपये प्रति माह की आय को ‘अनियमित या मनमाना’ नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट की ओर से मृतक की आय की मात्रा को 12,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये प्रति माह करके मुआवजे में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं था।

शीर्ष अदालत ने मुआवजे की कुल राशि 26.75 लाख रुपये बहाल कर दी और आदेश दिया कि मृतक के परिवार को देय  राशि का भुगतान 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित एक महीने के भीतर किया जाए।

दूसरा मामला: मृतक एक बढ़ई था
एक अन्य मामले में एमएसीटी ने मृतक के परिवार को 24.59 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, जो एक बढ़ई था, उसकी मूल आय 15,000 रुपये प्रति माह आंकी गई थी। उच्च न्यायालय ने एमएसीटी द्वारा गणना की गई आय को फिर से 15,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया। इस शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में मृतक एक बढ़ई था। दुर्घटना तीन मई, 2015 को हुई थी। ऐसे मामलों में कमाई पर सुदृढ़ नजरिया अपनाया जाना चाहिए था, क्योंकि (कमाई के) दस्तावेजी सबूत उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।  

शीर्ष अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए 24.59 लाख रुपये की मुआवजा राशि को बहाल कर दिया और निर्देश दिया कि अपीलकर्ता यानी मृतक के परिजन को देय शेष राशि का भुगतान नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ एक महीने के भीतर किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें