सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओएनजीसी की इस दलील पर नाखुशी जताई कि मध्यस्थ अत्यधिक और मनमाना शुल्क की वसूली कर रहे हैं। चीफ जस्टिस एन वी रमना, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति के के वेणुगोपाल की पीठ ने कहा कि क्या हमें यह कहना चाहिए कि किसी मध्यस्थ को बिना पैसा लिए काम करना चाहिए। इससे तो बेहतर है कि मध्यस्थता प्रणाली बंद कर दी जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थों को पक्षों द्वारा उनकी सहमति में तय शुल्क लेना चाहिए और पीठ को एकसमान दिशा-निर्देश बनाने चाहिए। पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल, बहुत विनम्रता से आपसे कहना चाहते हैं कि जिस तरह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम काम कर रहे हैं, वह सराहनीय नहीं है। मध्यस्थ इस प्रक्रिया में खुद का पक्ष नहीं रख सकते, महज इसलिए आप पूर्वाग्रह की बात नहीं कर सकते। नियुक्ति के समय ही आपको कहना होगा कि आप शुल्क से सहमत नहीं हैं।