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Supreme Court: 'पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के लिए तंत्र पर विचार'; ईडी व राज्य के अधिकारियों से जुड़े केस पर SC

Thu, 25 Jan 2024 10:24 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकारों के अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच पर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच तंत्र तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने गुरुवार को कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए जांच तंत्र कैसे बनाया जा सकता है, अदालत इस पर विचार कर रही है। अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध के कारण जांच को विफल करने की आशंकाओं को दूर किया जाना अहम है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर जांच तंत्र बनाने पर विचार किया जा रहा है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से दाखिल याचिका पर तमिलनाडु सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करना होगा। ईडी ने अपने अधिकारी अंकित तिवारी के खिलाफ मामले की जांच को ट्रांसफर करने की मांग की है। अंकित तिवारी को तमिलनाडु के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी करप्शन (TNDVAC) के मुताबिक अंकित सीबीआई अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोपी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने तमिलनाडु पुलिस को कहा है कि सुनवाई की अगली तारीख पर घूस देने के आरोपी अंकित के खिलाफ जांच के दौरान मिले साक्ष्यों को अदालत में पेश किया जाए। ईडी की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि सरकार में शामिल मंत्रियों के खिलाफ ईडी की जांच से जुड़ी फाइलों को पुलिस अपने साथ ले गई है।
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जस्टिस सूर्यकांत ने मुकदमे में तमिलनाडु सरकार की पैरवी कर रहे सीनियर वकील- कपिल सिब्बल और अमित आनंद तिवारी को जांच पर रोक लगाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि रिश्वतखोरी के मामले में अंकित तिवारी के खिलाफ अगली सुनवाई तक जांच पर रोक रहेगी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने तमिलनाडु सरकार के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय से भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच प्रणाली बनाने के संबंध में सुझाव भी मांगे।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, अदालत नहीं चाहती कि हमारे संघीय ढांचे में जांच को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होता रहे। आरोप-प्रत्यारोप का लाभ उठाकर वास्तविक अपराधी कानून के शिकंजे से बच निकले, ऐसा नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा, यह तो बस शुरुआत है। अलग-अलग राज्यों में ईडी अधिकारी तैनात हैं। अगर ऐसे ही आरोप-प्रत्यारोप होता रहे तो इस देश का क्या होगा?

जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा, ईडी कार्यालय पूरे भारत में हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि ईडी के अधिकारी प्रतिशोध में कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन मान लीजिए कि किसी मामले में अगर जैसे-को-तैसा प्रतिक्रिया होगी, तो देश का क्या होगा?
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 
 
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