सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें अदालत से भारत संघ को चीन की सीमा के साथ क्षेत्र के नुकसान की सीमा के बारे में जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित और न्यायमूर्ति रवींद्र भट ने की।
गलवान घाटी में झड़प का दिया हवाला
शुरुआत में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि 14 और 15 जून, 2020 की रात को गलवान घाटी में झड़प हुई थी और संघर्ष के बाद भारतीय आधिकारिक रुख यह था कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह आधिकारिक रुख भारत के नागरिकों को गुमराह कर रहा है।
मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने तुरंत ध्यान दिया कि मामला राज्य की नीति से संबंधित है और अदालत के लिए इसमें दखल देने लायक कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि ये राज्य का मामला है। इस तरह के मुद्दे हो सकते हैं। क्षेत्र की सीमा पर झड़पें हो सकती हैं। चाहे क्षेत्र का नुकसान हुआ हो, चाहे दूसरी तरफ से अतिक्रमण गया हो या हम आगे बढ़े हो या नहीं, ये अदालत का मामला नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने भारत संघ से क्षेत्र के नुकसान की सीमा के बारे में सही जानकारी देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था और तर्क दिया था कि भारत संघ का आधिकारिक रुख यह है कि हमने कोई क्षेत्र नहीं खोया है। यह न केवल भारत की जनता को गुमराह करता है बल्कि यह जनता को अंधेरे में भी रखता है जबकि दुश्मन सीमा पर सुरक्षा का निर्माण कर रहा है। यह भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा पैदा करता है। हालांकि याचिका खारिज कर दी गई।
रिजिजू ने फैसले का स्वागत किया
कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने फैसले का स्वागत किया। रीजीजू ने ट्विटर पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट बिल्कुल सही है। ऐसे मामलों को कोर्ट में नहीं लाया जाना चाहिए। सरकार को ऐसे मामलों से निपटना है। नागरिकों को संवेदनशील जमीनी हकीकत के बारे में भारतीय सेना पर भरोसा करना चाहिए।