जेपी समूह को बड़ा उच्चतम न्ययाालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने बुधवार को जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड की कारपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया को 90 दिन में पूरा करने का आदेश दिया और कहा कि परिवर्तित समाधान योजना सिर्फ एनबीसीसी और सुरक्षा रियलटी से ही मंगाई जाएगी।
उच्चतम अदालत ने कहा कि एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण) या एनसीएलएटी के समक्ष अंतरिम निर्देश के लिए लंबित अर्जी समेत अन्य आवेदन इन दो बोली लगाने वालों से संशोधित समाधान योजना स्वीकार करने और उस पर कार्रवाई करने के मामले में दिवाला समाधान प्रक्रिया में बाधक नहीं होगा।
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा कि वह मकान खरीदारों, जेपी समूह और संबंधित बैंकों के साथ पूरा न्याय करने के लिए ‘असाधारण स्थिति’ में यह निर्देश दे रहे हैं। पीठ ने कहा कि हम दिवाला समाधान प्रक्रिया को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया आज से 90 दिन के भीतर पूरा करने का निर्देश देते हैं।
इसमें से पहले 45 दिन में दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत सिर्फ सुरक्षा रियलटी और एनबीसीसी से संशोधित समाधान योजना मंगाया जा सकेगा। न्यायालय ने कहा कि ये दोनों जेपी इंफ्राटेक के लिए अंतिम बोली लगाने वालों में थे। दोनों ने पहले भी समाधान योजना पेश की थी और वे बातचीत के बाद कर्जदाताओं की समिति के समक्ष अपनी संशोधित योजना, यदि ऐसा आवश्यक हुआ, पेश करें और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण को सौंपे।
पीठ ने कहा कि दूसरे चरण की 45 दिन की अवधि 21 दिसंबर, 2019 से शुरू हो रही है। इसमें किसी भी तरह की कठिनाई को दूर करने और निर्णय करने वाले प्राधिकार को उचित आदेश पारित करने के लिए समय दिया गया है। पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ जेपी समूह की याचिका पर यह आदेश पारित किया। अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में जेपी समूह को कर्ज में डूबी जेपी इंफ्रा लिमिटेड की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया था।