सुप्रीम कोर्ट ने नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को ‘हिंसक पशु’ की श्रेणी में डालने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को निरस्त करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में एक वर्ष के लिए नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को हिंसक पशु की श्रेणी में डालने के लिए तीन अधिसूचना जारी की है। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने गौरी मुलेखी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अगर वह चाहें तो हाईकोर्ट जा सकते हैं।
याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार को इस तरह की अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि इन जानवरों को मारने के लिए लोग भाड़े पर रखे जा रहे हैं।