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Supreme Court: जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई स्थगित करने से इनकार

Wed, 16 Nov 2022 03:00 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संविधान पीठ ने जल्लीकट्टू के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई 23 नवंबर को तय की है। पांच जजों की संविधान पीठ में जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ऋषिकेस रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार शामिल हैं। यही पीठ मामले को सुन रही है। 
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तमिलनाडु में जल्लीकट्टू - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के 'जल्लीकट्टू'  खेल और महाराष्ट्र की बैलगाड़ी दौड़ के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने से इनकार कर दिया। इन याचिकाओं में तमिलनाडु व महाराष्ट्र सरकार के इन खेलों से संबंधित कानूनों को चुनौती दी गई है। 

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को स्थगित करने से इनकार कर दिया। तमिलनाडु सरकार के वकील ने शीर्ष कोर्ट से आग्रह किया था कि वह जल्लीकट्टू (सांडों को काबू में करने के खेल) पर सुनवाई शीतकालीन अवकाश के बाद करे, क्योंकि मामले में एक संकलित रिपोर्ट पेश की जाना है। इस पर जस्टिस जोसेफ ने वकील को रिपोर्ट जल्द दायर करने का निर्देश देते हुए कहा कि जल्लीकट्टू जनवरी में है, हम याचिका पर सुनवाई स्थगित नहीं करेंगे।



इसके पहले शीर्ष कोर्ट की संविधान पीठ ने जल्लीकट्टू के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई 23 नवंबर को तय की है। पांच जजों की संविधान पीठ में जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ऋषिकेस रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार शामिल हैं। यही पीठ मामले को सुन रही है। 
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तमिलनाडु व महाराष्ट्र ने दी इजाजत
बता दें, फरवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को यह मामला भेजा था। सवाल उठाया गया है कि क्या तमिलनाडु और महाराष्ट्र के लोग 'जल्लीकट्टू' और बैलगाड़ी दौड़ को अपना सांस्कृतिक अधिकार बताते हुए उसे संरक्षित कर सकते हैं? क्या संविधान के अनुच्छेद 29 (1) के तहत वे इनकी सुरक्षा की मांग कर सकते हैं? तमिलनाडु और महाराष्ट्र सरकारों ने केंद्र द्वारा बनाए गए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 में संशोधन किया है और अपने अपने राज्यों में क्रमशः जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति दी है। 

पेटा ने की जल्लीकट्टू कानून रद्द करने की मांग
दोनों राज्यों के संबंधित कानूनों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की गई हैं। पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) के नेतृत्व में याचिकाओं के एक समूह ने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित जल्लीकट्टू कानून को रद्द करने की मांग की है। पेटा ने विधानसभा द्वारा पारित पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (तमिलनाडु संशोधन) विधेयक 2017 को कई आधारों पर चुनौती दी है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले तमिलनाडु सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें राज्य में 'जल्लीकट्टू' और देश भर में बैलगाड़ी दौड़ में बैलों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के 2014 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी।

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