इंडिया कहो या भारत, नाम में क्या रखा है: सुप्रीम कोर्ट्र
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सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) से पूछा है कि क्या वह कॉल ड्रॉप होने पर टेलिकॉम कंपनियों पर जुर्माना करने संबंधी अपने निर्णय में संशोधन पर विचार कर सकता है। साथ ही अदालत ने ट्राई को कॉल ड्रॉप की तकनीकी पहलुओं से संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि कॉल ड्रॉप होने पर जुर्माना लगाने संबंधी नियम (रेगुलेशन) तैयार करते समय किसी ने इससे जुड़ी तकनीकी दस्तावेजों पर गौर नहीं किया।
पीठ ने ट्राई को इन कागजातों पर गौर करने का निर्देश देते हुए हलफनामे के जरिए यह बताने के लिए कहा है कि वह अपने निर्णय में बदलाव करने पर विचार करने को तैयार है या वह अपने निर्णय पर कायम है। पीठ ने कहा कि आपका जो भी पक्ष हो लेकिन वह कारणों केसाथ हो।
पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ट्राई ने नियम बनाने वक्त तकनीकी दस्तावेजों पर ध्यान नहीं दिया। पीठ ने ट्राई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिंहा से कहा कि कॉल ड्रॉप को लेकर नए नियमन बनाने केएक महीने केबाद आप तकनीकी दस्तावेज लेकर आए और यह स्वीकार किया कि कॉल ड्रॉप होते हैं और इसके लिए सिर्फ टेलिकॉम कंपनियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने ट्राई को यह भी बताने के लिए कहा कि नियमन बनाने केएक महीने बाद तकनीकी कागजात क्यों जारी किए गए। तकनीकी कागजातों में कहा गया है कि कॉल ड्रॉप केलिए सिर्फ सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि इसके अन्य कारण भी है।
वहीं सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वह इस मसले पर ट्राई केपास मिल-बैठकर रोडमैप बनाने को तैयार हैं। मालूम हो कि ट्राई ने निर्णय लिया था हर कॉल ड्रॉप पर ऑपरेटरों को उपभोक्ताओं को एक रुपये मुआवजा देना होगा।