सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति को लेकर गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाया। आदालत ने देश में वेश्यावृत्ति को एक पेशा करार दिया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस इसमें दखलंदाजी नहीं कर सकती और न ही सहमति से यह कार्य करने वाले सेक्स वर्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है। शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सेक्स वर्कर भी कानून के समक्ष सम्मान व बराबरी के हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह अहम फैसला दिया। पीठ ने सेक्स वर्करों के अधिकारों की रक्षा के लिए छह सूत्रीय दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया में भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। आपको बताते हैं इसे लेकर यूजर्स की क्या राय है।
एक यूजर @KrishnapalGurj3 ने पूछा, क्या आपको लगता है कि यह सही है? पुलिस को सेक्स वर्कर से बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए। मीडिया को किसी की फोटो या नाम नहीं बताना चाहिए।
@Avibyaktireal नाम के एक यूजर ने लिखा- अब सेक्स वर्कर भी लेबर लॉ के दायरे में आएंगी।
Rajesh@rajeshkasakani लिखते हैं, अच्छा फैसला...वे लोग इसमें अपनी मर्जी से नहीं जाते, किसी मजबूरी में उन्हें यह काम करना पड़ता है। वे भी सम्मान के हकदार हैं।
@crazyme_ag लिखते हैं, एक अच्छा बदलाव जो हो सकता है कि समाज को न दिखे लेकिन बहुत लोगों के लिए जो ये काम करते हैं, उन्हें दिखेगा। आप क्या कहते हैं?
@rihito_bahha ने लिखा- इस निर्णय के अपने पक्ष और विपक्ष हैं, लेकिन मुख्य चिंता है कि अब निर्दोष महिलाओं को इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए मजबूर किया जाएगा।
@MTvalluvan ने लिखा- सेक्स वर्कर्स को गाली और प्रताड़ित न करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक दोधारी चाकू है! इससे पुलिस पीड़ित बन सकती है। दूसरी ओर नियम ढीले करने से दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं कम हो सकती हैं।
@YouthClub_Jammu ने लिखा- सुप्रीम कोर्ट का बहुत अच्छा फैसला, अक्सर पुलिस प्रताड़ित करती है।
@TheHauterfly लिखती हैं, गंगूबाई ने पूरी जिंदगी सम्मान वापस पाने की लड़ाई में बिता दी थी, आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लगता है कि हालात बदल रहे हैं।