पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनाव याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग करने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के एडिशनल जज जस्टिस कौशिक चंदा को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त की सिफारिश की गई है।
चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सिफारिश बृहस्पतिवार को शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई।
जस्टिस चंदा ने सात जुलाई को ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी थी।
साथ बनर्जी ने उनकी भाजपा से कथित नजदीकी का भी आरोप लगाया था। ममता के वकील ने अपनी चुनाव याचिका को एक अन्य पीठ को सौंपने का अनुरोध करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र भी लिखा था।
इसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री ने ‘माननीय न्यायाधीश की कलकत्ता हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी’ और संबंधित न्यायाधीश की ओर से पूर्वाग्रह की आशंका है।
हालांकि जस्टिस चंदा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह कभी भी भाजपा की कानूनी सेल के समन्वयक नहीं रहे लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट में कुछ मामलों में पार्टी का पक्ष रखा। तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने जस्टिस चंदा के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी और उनका कार्यकाल हाईकोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर 2036 तक रहेगा।
कर्नाटक हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीशों के रूप में छह नामों को मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर्नाटक हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए छह एडिशनल जजों के नामों के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता में कॉलेजियम की मंगलवार को हुई बैठक में इन नामों को स्वीकृति दी गई और इसे बृहस्पतिवार को शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
कॉलेजियम ने जस्टिस नेरानाहल्ली श्रीनिवासन संजय गौड़ा, ज्योति मुलिमणि, नटराज रंगास्वामी, हेमंत चंदनगौदर, प्रदीप सिंह येरूर और महेशन नागप्रसन्ना के नामों को मंजूरी दी है।
साथ ही कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के एडिशन जज जस्टिस कौशिक चंदा की स्थायी न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। तीन सदस्यीय कॉलेजियम में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एएम खानविलकर भी हैं।