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सुप्रीम कोर्ट: ट्रायल में देरी वजह से अनिश्चितकाल के लिए सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता 

Wed, 28 Jul 2021 05:29 AM IST
Amit Mandal राजीव सिन्हा, नई दिल्ली

सार

  • राजस्थान के भंवरी हत्याकांड के एक आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
  • गत वर्ष विश्नोई को राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मूल्य होता है और उन्हें सिर्फ इसलिए अनिश्चित काल के लिए सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता है क्योंकि सीबीआई अपने ट्रायल को समय पर पूरा नहीं कर सका। देरी के बावजूद सीबीआई द्वारा आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध करने पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को जमकर फटकार लगाई । मामला हत्या का था और इसमें राजस्थान के कांग्रेसी नेता कथित तौर पर शामिल हैं।

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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा, अगर सीबीआई सालों तक लोगों पर मुकदमा चलाने में सक्षम नहीं है तो हमसे क्या करने की उम्मीद की जाती है? एजेंसी अपना काम ठीक से नहीं कर पाई है। लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का कुछ मूल्य होता है। हम लोगों को हमेशा के लिए सलाखों के पीछे नहीं रख सकते।

यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 के भंवरी देवी हत्या मामले में पारस राम विश्नोई की जमानत को जमानत दे दी। इस मामले में राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री महिपाल सिंह मदेरणा और पूर्व विधायक मलखान सिंह बिश्नोई को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
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सीबीआई ने कांग्रेस नेताओं, परिवार के कुछ सदस्यों और कॉन्ट्रैक्ट किलर सहित 17 लोगों को भंवरी (36) के अपहरण और हत्या मामले मेंआरोपित किया है। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, एक प्रशिक्षित नर्स भंवरी, सितंबर 2011 में एक सीडी सामने आने के बाद गायब हो गई थी। सीडी में कथित तौर पर मदेरणा को उसके साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। इसके बाद भंवरी को ब्लैकमेल किया जा रहा था। जमवरी 2012 में भंवरी के शरीर के अवशेष जोधपुर में मिले थे।

गत वर्ष विश्नोई को राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिनके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गत फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को रोजाना सुनवाई कर जल्द से जल्द ट्रायल पूरा करने के लिए कहा था। मंगलवार को विश्नोई के वकील ने पीठ को बताया कि अब तक ट्रायल पूरा पूरा नहीं किया जा सका है।

वहीं सीबीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है। जिस पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर यह मामला इतना गंभीर है तो सीबीआई आठ साल में भी ट्रायल को पूरा करने में क्यों नहीं सफल रही है। आरोपी को यह नहीं पता कि ट्रायल कब पूरा होगा, ऐसे में उसे कितने दिनों तक सलाखों के भीतर रखा जाएगा।  यह कहते हुए पीठ ने विश्नोई की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया।

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