कोर्ट ने आगे कहा कि उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज देने के लिए क्या किया जा रहा है जो कोविड-19 के संपर्क में है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर इस संकट के समय लोगों द्वारा अपील करने पर कोई भी राज्य उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती या कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।
कार्रवाई की तो मानेंगे अवमानना - कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा ऐसा करने पर हम उसे अवमानना मानेंगे। हमें अपने नागरिकों की आवाज सुननी चाहिए और न कि उनकी आवाज को दबाना चाहिए।
क्या देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है- कोर्ट
इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या भारत में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है जबकि प्रति दिन 8500 मीट्रिक टन की औसत मांग है। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 10,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दैनिक आधार पर उपलब्ध है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। लेकिन कुछ राज्यों द्वारा कम ऑक्सीजन लेने के कारण कुछ क्षेत्रों में उपलब्धता कम हो जाती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि दिल्ली, राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करती है और शायद ही कोई पूरी तरह से दिल्लीवासी है। भूल जाइए कि कोई ऑक्सीजन नहीं उठा पा रहा है। आपको जान बचानी होगी। केंद्र के रूप में आपके पास एक विशेष जिम्मेदारी है।
राजनीति अलग रखें, केंद्र से बात करे दिल्ली सरकार
इसके अलावा न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील राहुल मेहरा से कहा कि हम चाहते हैं कि आप सर्वोच्च अथॉरिटी को संदेश दें कि इस मानवीय संकट में केंद्र सरकार के साथ सहयोग की भावना होनी चाहिए। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोई राजनीतिक झमेला नहीं होना चाहिए, उसे कोविड-19 की स्थिति से उबरने के लिए केंद्र के साथ सहयोग करना चाहिए। जीवन बचाना प्राथमिकता है। राजनीति चुनाव के लिए है, मानवीय संकट के इस समय में हर जिंदगी पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि कृपया हमारा संदेश शीर्ष स्तर पर पहुंचा दीजिए कि राजनीति एक तरफ रखें, केंद्र से बात करें।