पंजाब में अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगती नहीं दिख रही है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि लगता है पंजाब में हर गली में भट्ठी खुली हुई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने पाया कि पिछले दो वर्षों में इस संबंध में करीब 36000 हजार प्राथमिकी दर्ज की गई है। पीठ ने राज्य सरकार से स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी तय करने और इस पर लगाम लगाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने के लिए कहा है। अब पीठ इस मामले में 12 दिसंबर को सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ' ऐसा लगता है पंजाब में हर गली में भट्ठी खुली है। युवाओं को बर्बाद कर देश को बर्बाद किया जा सकता है।सीमावर्ती राज्य की ऐसी स्थिति खतरनाक है।' वहीं पंजाब सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि पिछले दो सालों में लगभग 36 हजार मुकदमे दर्ज किए हैं। इसके अलावा 13 हजार भट्ठियां ध्वस्त की हैं।
इस पर जस्टिस शाह ने कहा, 'सिर्फ प्राथमिकी दर्ज करने से क्या होगा? क्या अवैध शराब बनाने वाले इसे गंभीरता से ले रहे हैं? पीठ ने पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत कुमार सिन्हा से कहा, 'आपने खुद कहा कि शराब की भट्ठी तोड़े जाने के बावजूद लोग नई भठ्ठी लगा ले रहे हैं और अवैध शराब बन रही है। स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी तय करनी होगी।'
जवाब में सिन्हा ने कहा कि जो भट्ठियां तोड़ी गई हैं, उनसे करोड़ों का जुर्माना वसूला गया है। तब जस्टिस शाह ने कहा, 'आप इन पैसे को सरकारी खजाने में न जमा करें बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में खर्च करें, जिससे कि कार्रवाई में तेजी आ सके।
राज्य सरकार के वकील ने यह भी कहा कि वहां व्यवसायिक रूप से बिक्री की बजाय निजी उपभोग के लिए शराब ज्यादा बनाई जा रही है. इस पर पीठ ने कहा कि तो निजी उपयोग के लिए शराब बनाने की इजाज़त सरकार दे देगी क्या? वहां व्यवसायिक बिक्री भी हो रही है। हाल ही में नकली शराब पीकर पंजाब में चार लोग मर गए। इसे पीने वाले ज्यादातर गरीब मजदूर होते हैं। वह थकान के मारे इसे पी लेते हैं लेकिन अवैध शराब न बने और न बिके, यह कौन देखेगा?'
शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार से इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने के लिए कहा। जिस पर राज्य सरकार ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा, लेकिन पीठ ने 12 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख तय करते हुए सरकार को उससे पहले जवाब दाखिल करने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, 'इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। शराब हो या ड्रग्स, युवाओं को नशे में डुबो कर देश को तबाह किया जा सकता है।'