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आरएफएल गबन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा, शिविंदर सिंह के खिलाफ जांच 15 दिसंबर तक पूरी करें

Thu, 02 Dec 2021 03:59 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आरएफएल गबन मामले में आरोपी शिविंदर सिंह के खिलाफ जांच में लग रहे लंबे समय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को जांच पूरी करने के लिए 15 दिसंबर तक का समय दिया है।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से कहा कि वह 15 दिसंबर तक फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह के खिलाफ मामले में जांच पूरी करे। सिंह समेत कुछ अन्य लोगों पर रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) की पूंजी में से 2397 करोड़ रुपये का गबन करने का आरोप है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से जांच को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए कहा।

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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि जांच उन्नत चरण में है। उन्होंने जांच पूरी करने के लिए इस महीने के अंत तक का समय मांगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि हम अधिक समय नहीं देंगे। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 तारीख तय कर दी। पीठ ने कहा कि मामला लगातार लंबित है। आप फिर से समय चाहते हैं। आपको एक बात याद रखनी होगी कि आप पक्ष नहीं ले सकते हैं। आपको एक निष्पक्ष जांच करनी होगी। आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों को निष्पक्ष ही होना चाहिए।

हम तय करेंगे कि जमानत देनी है या नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई कर रही पीठ में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण के अलावा न्यायाधीश एएस बोपन्ना और हिमा कोहली भी शामिल थीं। शिकायतकर्ता मनप्रीत सूरी (आरएफएल) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने कहा कि गवाहों को शांत करने के लिए 200 करोड़ रुपये दिए गए हैं और शिविंदर मोहन सिंह  को जमानत देना खतरनाक होगा। इस पर पीठ ने कहा कि यह जमानत का मामला है, हम तय करेंगे कि जमानत देनी है या नहीं। मामले को जानबूझकर बड़ा मत करिए। यह जमानत का एक साधारण मामला है।
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जांच पूरी होने में आखिर कितना समय लगना चाहिए?
दिल्ली हाईकोर्ट ने मई में यह कहते हुए सिंह की जमानत रद्द कर दी थी कि उन्होंने जो साजिश रची है उसकी तह तक पहुंचने के लिए और गबन किए गए पैसे तक पहुंचने के लिए सिंह को गिरफ्त में रखना जरूरी है। दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने हाल ही में कहा था कि उसे इस मामले की जांच पूरी करने के लिए चार और महीनों की आवश्यकता है। पीठ ने दिल्ली पुलिस को 15 दिसंबर तक का समय देते हुए कहा कि जांच पूरी करने में आखिर और कितना समय लगना चाहिए? यह कभी खत्म न होने वाली कहानी नहीं हो सकती। 

मार्च 2019 में हुई थी एफआईआर, जानिए पूरा मामला
सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्हें यह जमानत ट्रायल कोर्ट ने प्रदान की थी। ईओडब्ल्यू ने मार्च 2019 में सूरी की शिकायत पर रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पूर्व सीएमडी सिंह, सुनील गोधवानी और आरएफएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। सूरी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के नाम पर लिए गए कर्ज की राशि को इन लोगों ने अन्य कंपनियों में निवेश किया और आरएफएल कंपनी को बेहद खराब स्थिति में लाकर रख दिया।

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