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दिल्ली में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण पर SC सख्त, सील करने वाली समिति फिर बहाल

Thu, 07 Dec 2017 09:50 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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राष्ट्रीय राजधानी में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इमारतों के निर्माण की इजाजत देने में नियमों को पूरी तरह तोड़ा गया है। ऐसे निर्माण की पहचान और उन्हें सील करने के लिए शीर्ष अदालत ने 2006 की निगरानी समिति को बहाल करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत की जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने दक्षिण दिल्ली के म्युनसिपल कमिश्नर को व्यक्तिगत तौर पर उसके समक्ष पेश होने का समन जारी किया है। बेंच ने दक्षिण दिल्ली के महरौली में अवैध कालोनी के निर्माण का गंभीरता से संज्ञान लिया है।
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शीर्ष अदालत ने दिल्ली में अवैध परिसरों एवं निर्माण की पहचान और उन्हें सील करने के लिए निगरानी समिति की शक्तियां बहाल करने का फैसला किया है। 2012 में इसमें राहत दे दी गई थी। मामले की सुनवाई 14 दिसंबर तक आगे  बढ़ाते हुए पीठ ने कहा कि अवैध निर्माण से दिल्ली के पर्यावरण खासकर सीवर और पार्किंग व वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े मुद्दों पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।

शीर्ष अदालत ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल से यह सुनिश्चित करने में मदद मांगी कि जहां तक निर्माण गतिविधियों का संबंध है, आगे से कोई कानून न तोड़ा जाए। पीठ ने कहा कि महरौली की साई कुंज नाम की अनधिकृत कालोनी की ओर हमारा ध्यान दिलाया गया है। यह कॉलोनी दक्षिण दिल्ली म्युनसिपल कॉरपोरेशन (एसडीएमसी) के तहत आने वाली कृषि भूमि पर बनी है।
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ये थे सीलिंग करने वाली निगरानी समिति में

प्रतीकात्मक तस्वीर
निगरानी समिति में चुनाव आयुक्त के पूर्व सलाहकार केजे राव, ईपीसीए के चेयरमैन भूरे लाल, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सोम जिंगन शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सीलिंग संबंधी प्रक्रिया की निगरानी के लिए 24 मार्च 2006 को समिति का गठन किया गया था। अदालत ने इसके बाद 2012 में समिति से कहा था कि कोई संपत्ति सील नहीं करें, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि प्राधिकार अपना दायित्व निभाएंगे।

एसडीएमसी के कमिश्नर अदालत आकर बताएं, उनका संवैधानिक दायित्व क्या: पीठ ने कहा कि एसडीएमसी के कमिश्नर अगली सुनवाई पर अदालत में पेश होकर बताएं कि उनका और उनके जूनियर अधिकारियों का संवैधानिक दायित्व क्या है। ये दायित्व क्यों नहीं निभाए जा रहे हैं। पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि दिल्ली में इमारतों के निर्माण और इसकी अनुमति देने में नियमों का पूरी तरह तोड़ मरोड़ दिए गए हैं।
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