एनसीएलएटी द्वारा नियुक्त अंतरिम समाधान पेशेवर ने कोर्ट को बताया कि पूर्व प्रबंधन ने कई घर खरीदारों को चेक जारी किए हैं, जो फंड नहीं होने के कारण बाउंस हो गए।
रियलिटी फर्म सुपरटेक लिमिटेड ने कर्जदाता यूनियन बैंक के साथ बकाया भुगतान के विवाद का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) को एक समझौता प्रस्ताव सौंपा है। कंपनी के पूर्व प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ से पूर्व प्रबंधन के वकील एस गणेश ने एनसीएलएटी को इस पर विचार करने का निर्देश देने का आग्रह किया।
विज्ञापन
इस पर पीठ ने कहा, आपने सौंपा है तो एनसीएलएटी इस पर विचार करेगी। हमें इस संदर्भ में कोई निर्देश देने की जरूरत नहीं है। ऐसा करना उपयुक्त नहीं है। वहीं न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि एनसीएलएटी के समक्ष यह माला 17 मई के लिए सूचीबद्ध था लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। एनसीएलएटी द्वारा नियुक्त अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) ने कोर्ट को बताया कि पूर्व प्रबंधन ने कई घर खरीदारों को चेक जारी किए हैं। जो पर्याप्त फंड नहीं होने के कारण बाउंस हो गए हैं और उन्होंने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराना शुरू कर दिया है।
इस पर पीठ ने कहा, उसे आईआरपी की रक्षा करने की जरूरत है और निर्देश दिया कि उसके खिलाफ ऐसी कोई कार्यवाही शुरू नहीं की जाए। वहीं घर खरीदारों के वकील ने कहा कि चेक बाउंस के लिए कानूनी कार्यवाही सीमा से वर्जित है। यदि वे निर्धारित समय के भीतर ऐसी कार्यवाही शुरू नहीं करते हैं, तो वे परक्राम्य साधन अधिनियम के तहत ऐसा करने का विकल्प गंवा देंगे। इसके बाद पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों के तहत समय सीमा को अगले आदेश तक बढ़ाने का निर्देश दिया।