पिछले दो दशक से उत्तरी गोलार्ध की तुलना में दक्षिणी गोलार्ध अधिक सूख रहा है। साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अल नीनो के कारण दक्षिण गोलार्ध में और सूखा पड़ेगा और इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा। लोगों को घटते जलस्तर के कारण संकट का सामना करना पड़ेगा।
अध्ययन के निष्कर्ष उपग्रहों के आंकड़ों, नदी और धारा प्रवाह के माप पर आधारित हैं। इस प्रक्रिया ने अध्ययनकर्ताओं को पानी की उपलब्धता में बदलावों का मॉडल और गणना करने में सक्षम बनाया। पानी की उपलब्धता भूमि पर वर्षा के रूप में परिदृश्य को आपूर्ति किए गए पानी की मात्रा और सामान्य वाष्पीकरण से या पौधों से उनकी पत्तियों के माध्यम से वायुमंडल में निकाले गए पानी के बीच का कुल अंतर है।
सिर्फ एक फीसदी पानी ही प्रयोग के लायक
धरती पर हर तरह के पानी का लगभग एक फीसदी ही ताजा या मीठा पानी है जो लोगों, पौधों या जमीन में रहने वाले जानवरों के लिए उपलब्ध है। बाकी महासागरों में है या ध्रुवीय बर्फ की चादरों और चट्टानों में बंद है। जलवायु में हो रहे बदलाव से दुनिया में उस एक फीसदी का वैश्विक वितरण बिल्कुल नए तरीके से महत्व रखता है।
दक्षिणी गोलार्ध में 81 फीसदी पानी
भले ही दक्षिणी गोलार्ध में वैश्विक भूमि क्षेत्र (अंटार्कटिका को छोड़कर) का केवल एक चौथाई हिस्सा है फिर भी उत्तरी गोलार्ध की तुलना में दुनियाभर में पानी की उपलब्धता पर इसका काफी अधिक प्रभाव पड़ता है। दक्षिणी गोलार्ध में ऑस्ट्रेलिया का दसवां हिस्सा, दक्षिण अमेरिका, एक तिहाई अफ्रीका तथा एशिया के कुछ दक्षिणी द्वीप मौजूद हैं। इसमें लगभग 81 फीसदी पानी (जो उत्तरी गोलार्ध से अधिक है) और 32 फीसदी भूमि (जो उत्तरी गोलार्ध से कम है) शामिल है।
दिखने लगे हैं दूरगामी असर
सूखे के कारण मुख्य कसावा की पैदावार में गिरावट आ रही है। कॉफी और कोको जैसे निर्यात में भी कमी आ रही है। इससे आजीविका का नुकसान, गरीबी और भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है। इसी प्रकार दक्षिण अमेरिका वैश्विक बाजार के लिए सोयाबीन, चीनी, मांस, कॉफी और फलों का एक प्रमुख कृषि निर्यातक है। पानी की उपलब्धता में बदलाव से दुनियाभर में खाद्य प्रणालियों पर तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में पानी की भारी कमी : नए विश्लेषण से पता चल है कि दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका का अधिकतर हिस्सा और मध्य और उत्तर-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पानी की उपलब्धता में भारी कमी आई है।