फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Study: वायु प्रदूषण से भी पार्किंसंस रोग का खतरा, दावा- हवा में मौजूद कणों से हो सकती है मस्तिष्क में सूजन

Wed, 01 Nov 2023 05:56 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्यूरोलॉजी मेडिकल जर्नल पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि वायु प्रदूषण और पार्किंसंस रोग के बीच संबंध देश के हर हिस्से में समान नहीं मिला है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 2.20 करोड़ लोगों से एकत्रित आंकड़ों पर यह अध्ययन किया है, जिसमें मानसिक विकार से जुड़े कुल 90 हजार रोगियों का चयन किया गया।
विज्ञापन
brain disease - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हवा में मौजूद प्रदूषण के छोटे कणों की वजह से इंसानों में पार्किंसंस बीमारी हो सकती है। इंसानों में इसका 56 फीसदी तक जोखिम देखने को मिला है। अध्ययन में पता चला है कि पीएम 2.5 या फिर उससे कम आकार वाले प्रदूषित कण सांस के जरिए मस्तिष्क तक जा पहुंचते हैं और फिर मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकते हैं।

विज्ञापन


इसी के चलते संबंधित व्यक्ति में पार्किंसंस रोग विकसित हो सकता है। न्यूरोलॉजी मेडिकल जर्नल पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि वायु प्रदूषण और पार्किंसंस रोग के बीच संबंध देश के हर हिस्से में समान नहीं मिला है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 2.20 करोड़ लोगों से एकत्रित आंकड़ों पर यह अध्ययन किया है, जिसमें मानसिक विकार से जुड़े कुल 90 हजार रोगियों का चयन किया गया।

इसके बाद उनके घर, आसपास का वातावरण और राज्य के बारे में जानकारी एकत्रित की। अमेरिका के बैरो न्यूरोलॉजिकल इंस्टीट्यूट के प्रमुख शोधकर्ता प्रो. ब्रिटनी क्रिजानोव्स्की ने बताया कि किसी व्यक्ति के सूक्ष्म प्रदूषित कणों के पिछले और बाद के संपर्क के बारे में भी जानकारी जुटाई गई। इस बीच यह पाया कि ओहियो नदी घाटी, मध्य उत्तरी डकोटा, टेक्सास के कुछ हिस्सों, कैनसस, पूर्वी मिशिगन और फ्लोरिडा के कुछ हिस्सों में पार्किंसंस रोग का हॉटस्पॉट था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें