देशभर के सभी 10.13 करोड़ छात्रों के मिड डे मील में अब अंडा, दूध, दूध से बने उत्पाद या केला भी शामिल हो सकता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी ने मिड डे मील के मेन्यू में इन्हें शामिल करने की अनुशंसा की है। फिलहाल आखिरी निर्णय केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री लेंगी। करीब सात साल बाद मिड डे मील के मेन्यू में प्रोटीन व कैलोरी की मात्रा बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
सरकार का मानना है कि बच्चों के विकास में कैलोरी और प्रोटीन की सही मात्रा होनी आवश्यक है। इसी के चलते मिड-डे मील के मेन्यू में बदलाव के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित की, ताकि वे सही सुझाव दे सकें। फिलहाल प्राइमरी विंग के बच्चों को एक समान 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन, जबकि छठीं से आठवीं कक्षा के बच्चों को 7 सौ ग्राम कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन दिया जाता है।
कमेटी ने सुझाव दिया है कि जो छात्र अंडा नहीं खाते हैं, ऐसे छात्रों को दूध, दुग्ध उत्पाद या फिर सोयाबीन से बने उत्पाद दिए जा सकते हैं। इसके अलावा केला तो मिलना ही चाहिए। कमेटी ने अनाज की मात्रा थोड़ी कम कर वसा बढ़ाने की सिफारिश की है। फिलहाल आंध्र प्रदेश, अरुणाचल, असम, झारखंड, केरल, उड़ीसा, तमिलनाडु आदि में अंडा या दूध दिया जा रहा है।