कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में खरगे को 7,897 वोट मिले, जबकि थरूर के खाते में केवल 1072 मत पड़े। खरगे तीन दशक से भी ज्यादा समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। छात्रसंघ से लेकर उन्होंने मजदूर संघ और फिर कांग्रेस के सर्वोच्च पद तक का सफर पूरा किया है।
मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। बुधवार को मतगणना के बाद उनके नाम का आधिकारिक एलान हो गया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस सांसद शशि थरूर को चुनाव में हरा दिया। हालांकि, पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि खरगे आसानी से चुनाव जीत लेंगे। हुआ भी कुछ ऐसा ही। खरगे को 7,897 वोट मिले, जबकि थरूर के खाते में केवल 1072 मत पड़े। खरगे तीन दशक से भी ज्यादा समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। छात्रसंघ से लेकर उन्होंने मजदूर संघ और फिर कांग्रेस के सर्वोच्च पद तक का सफर पूरा किया है।
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आइए जानते हैं खरगे के बारे में सबकुछ... ये भी कि उनके कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पार्टी को क्या फायदा मिलेगा?
कर्नाटक में जन्म, सरकारी स्कूल से की पढ़ाई
मल्लिकार्जुन खरगे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। पिता मपन्ना खरगे और मां का नाम सबावा था। खरगे ने कर्नाटक के गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद यहां सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। खरगे की रुचि शुरू से ही राजनीति में रही। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह छात्रों के मुद्दों को लेकर संघर्ष किया करते थे। इसी के कारण वह यहां स्टूडेंट यूनियन के महासचिव भी चुने गए थे।
खरगे ने राधाबाई से शादी की है और दोनों के पांच बच्चे भी हैं। इनमें दो बेटियां और तीन बेटे शामिल हैं। 2006 में मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने धर्म को लेकर एक बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि वह बौद्ध धर्म को मानते हैं।
वकालत की, फिर मजदूरों की लड़ाई लड़ने लगे
खरगे ने गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत की। इसके बाद वह मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने लगे। 1969 में वह एमकेएस मील्स कर्मचारी संघ के विधिक सलाहकार बने। इसके बाद उन्हें संयुक्त मजदूर संघ का प्रभावशाली नेता माने जाने लगा।
कांग्रेस में शामिल हुए और विधायक चुने गए
1969 में ही वह कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें गुलबर्गा कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। 1972 में पहली बार कर्नाटक की गुरमीतकल विधानसभा सीट से विधायक बने। खरगे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला। 2005 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। 2008 तक वह इस पद पर बने रहे। 2009 में पहली बार सांसद चुने गए।
खरगे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं। इसका समय-समय पर उनको इनाम भी मिला। साल 2014 में खरगे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हुआ तो खरगे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया।
खरगे के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां?
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'खरगे ऐसे वक्त पार्टी के अध्यक्ष चुने गए हैं, जब कांग्रेस को नई ताकत की जरूरत है। कांग्रेस लगातार देशभर में चुनाव हार रही है। ऐसे में खरगे के सामने चुनौतियों का बड़ा अंबार लगा है।' प्रमोद ने हमें खरगे के सामने की चार बड़ी चुनौतियों के बारे में बताया...
1. खुद से फैसला लेना : अभी कांग्रेस पर पूरी तरह से गांधी परिवार का राज है। भले ही गांधी परिवार के सदस्य पार्टी में किसी पद पर हों या न हों, लेकिन बगैर उनके कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। ये भी सही है कि कांग्रेस को गांधी परिवार से अलग रखकर बात भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे समय में खरगे के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह स्वतंत्र होकर पार्टी के लिए फैसला ले सकें, जिनमें गांधी परिवार का कोई दबाव न हो।
2. पार्टी में पड़ रही फूट को रोकना : राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लड़ाई जारी है। अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भी थरूर ने एक तरह से मोर्चा खोल रखा है। एक के बाद एक कई कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस विधायकों के बीच नाराजगी है। ऐसी स्थिति में खरगे के सामने दूसरी बड़ी चुनौती पार्टी में लगातार पड़ रही फूट को रोकना है।
3. जनता को विश्वास दिलाना और नए लोगों को जोड़ना : कांग्रेस फिर से तभी चुनाव जीत सकती है, जब वह जनता को ये भरोसा दिला पाए कि उनके लिए यही पार्टी बेहतर है। इसके लिए कांग्रेस को नए लोगों को पार्टी से जोड़ना होगा। खरगे के लिए ये भी एक चुनौती ही है।
4. विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव : अभी नवंबर में हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। इसके बाद गुजरात में भी चुनाव होगा। अगले साल यानी 2023 में दस राज्यों में विधानसभा चुनाव है। इनमें कर्नाटक भी शामिल है, जहां से खरगे खुद आते हैं। 2024 में भी सात राज्यों में विधानसभा के साथ-साथ लोकसभा चुनाव भी होगा। इन चुनाव में बेहतर परफॉरमेंस की चुनौती खरगे के सामने है।