विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और आसियान देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की पैरवी की। उन्होंने मंगलवार को कहा कि दोनों पक्ष ज्यादा सहयोग करके हिंद-प्रशांत क्षेत्र के उभरते क्षेत्रीय ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जयशंकर ने पहले आसियान फ्यूचर फोरम को डिजीटली संबोधित किया। उन्होंने कहा, हम आसियान एकता, आसियान केंद्रीयता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर आसियान के नजरिए का समर्थन करते हैं। भारत मानता है कि एक मजबूत और एकीकृत आसियान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के उभरते क्षेत्रीय ढांचे में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा, भारत के इंडो पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (आईपीओआई) और आसियान आउटलुक ऑन इंडो पैसिफिक (एओआईपी) के बीच तालमेल हमारे भारत और आसियन के नेताओं के साझा बयान में परिलक्षित होता है। जो सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है और जिसमें व्यापक सुरक्षा की चुनौतियों का समाधान शामिल है।
भारत की मेजबानी में जी-20 शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि वैश्विक दक्षिण अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़ी भूमिका निभाए। पिछले साल हमारी जी-20 की अध्यक्षता के दौरान हमने कई आसियान सदस्यों की भागीदारी के साथ वर्चुअल 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' शिखर सम्मेलन आयोजित किया था।
उन्होंने कहा, आज एक बहुध्रुवीय एशिया और एक बहुध्रुवीय विश्व तेजी से स्पष्ट हो रहे हैं। यह उभरती हुई विश्व व्यवस्था की हकीकतों से निपटने में आसियान और भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका को सामने लाता है। यह भारत और आसियान के बीच ज्यादा सहयोग और समन्वय की जरूरत पर जोर देता है।
वियतनाम की अध्यक्षता में हनोई में मंगलवार को आसियान फ्यूचर फोरम का शुभारंभ हुआ। इस साल फोरम का विषय 'तेज और सतत विकास की ओर जन केंद्रित आसियान समुदाय'है। इस वर्ष के आयोजन का उद्देश्य डिजिटल युग में एक सामंजस्यपूर्ण और गतिशील आसियान व्यापार समुदाय को बढ़ावा देना है।