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Heatwave: भारत के पांच राज्यों में अगले पांच दिन पड़ेगी प्रचंड गर्मी, अमेरिका की एजेंसी ने भी किया सावधान

Sat, 18 May 2024 04:16 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Heatwave: अमेरिका के ‘क्लाइमेट सेंट्रल’ का कहना है कि भारत में 18 मई से 21 मई के बीच किसी एक दिन भीषण गर्मी का असर देखने को मिलेगा। उधर भारतीय मौसम विभाग ने पांच राज्यों में अत्यधिक गर्मी का अलर्ट जारी किया है। 

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गर्मी से हाल हुआ बेहाल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारत के कई राज्यों में भीषण गर्मी ने कहर बरपाया हुआ है। इस बीच अमेरिका में जलवायु वैज्ञानिकों के समूह क्लाइमेट सेंट्रल का कहना है कि भारत में 54.3 करोड़ लोगों को 18 मई से 21 मई के बीच किसी एक दिन भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। क्लाइमेट सेंटर के उपाध्यक्ष एंड्र्यू पेर्शिंग का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने अत्यधिक गर्मी की संभावनाओं को और ज्यादा बल दे दिया है। 

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भारतीय मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने भी अत्यधिक गर्मी और लू की संभावना जताई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत में लू और गर्मी की वजह से लोग और भी ज्यादा परेशान होंगे। खासतौर पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा।  शुक्रवार को उत्तर भारत में लू और भीषण गर्मी की वजह से लोग बेहद परेशान रहे। दिल्ली के नजफगढ़ में  47.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो कि इस सीजन में देश में सबसे अधिक है। शनिवार को भारतीय मौसम विभाग ने एक बार फिर गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया। मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिन उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में लू का असर देखने को मिलेगा। इसके अलावा पूर्व और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में भी अगले तीन दिन तक लोग लू के थपेड़ों से परेशान रहेंगे।   

लू के कारण हर साल 1.53 लाख लोगों की मौत
उधर ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्विद्यालय के शोध के अनुसार दुनियाभर में लू (हीटवेव) के कारण हर साल 1.53 लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है। इस अध्ययन में भारत के लिए चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। बताया गया है कि 1.53 लाख लोगों की मौत में पांचवा सबसे बड़ा हिस्सा भारत से है। यानी हर पांच में एक मौत भारत में हो रही है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो भारत में हर वर्ष लू से करीब 30,000 लोगों की मौत हो रही है। मोनाश विश्विद्यालय के शोध के अनुसार ये आंकड़े 1990 के बाद के 30 वर्षों के हैं। 
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि लू (हीटवेव) की वजह से बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक समस्याएं हो सकतीं हैं। 

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