ताजमहल की दक्षिणी पश्चिमी मीनार के गिरे हुए कलश को दोबारा लगाने के लिए स्टील की रॉड फिट की जाएगी। एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने शुक्रवार को कलश के अंदर पूरी तरह से गल चुकी आयरन रॉड को मीनार की छतरी से निकाल लिया।
सात फुट ऊंचे कलश में नौ फुट लंबी रॉड बीच में मजबूती देने के लिए लगी हुई थी। एएसआई ने कॉपर का विकल्प छोड़कर स्टील की नौ फुट लंबी रॉड तैयार कराई है। ताज की अन्य तीन मीनारों के कलश और रॉड की मजबूती भी जांची जा रही है।
ताजमहल की दक्षिण पश्चिमी मीनार से 28 मार्च को कलश गिर गया था। सात फुट ऊंचे कलश के बीच से चार फुट हिस्सा नीचे गिरा। सात हिस्सों में लगे कलश के बीचोंबीच आयरन की रॉड थी, जो 200 फुट ऊंचाई पर तेज हवा के दबाव को झेलने के लिए लगाई गई थी। इसी रॉड के गलने से कलश गिर पड़ा था।
कैसे गली आयरन रॉड, होगी जांच
ताजमहल
- फोटो : amar ujala bureau
एएसआई के स्पेशलिस्ट कारीगरों ने शुक्रवार को मीनार की छतरी में दबा रॉड का बाकी दो फुट का हिस्सा भी बाहर निकाल लिया। कलश की सफाई के साथ ही स्टील की नौ फुट लंबी रॉड तैयार कराई है, जिसे लेड और स्पेशल मोर्टार के मिश्रण में लगाने के बाद कलश के हिस्सों को जोड़ा जाएगा। अभी तक एएसआई ताज समेत सभी स्मारकों में आयरन रॉड की जगह कॉपर रॉड का प्रयोग करती रही है। यह पहला मौका है जब कॉपर का विकल्प छोड़कर स्टील का प्रयोग किया जाएगा।
ताजमहल की मीनार में लगे कलश को मजबूती देने वाली लोहे की रॉड की एएसआई जांच करा रही है। एएसआई रसायन शाखा को रॉड के गले हुए हिस्सों की जांच करने को कहा गया है। आयरन रॉड के गलने के क्या कारण रहे, एएसआई इसे जानने के बाद संरक्षण के तरीकों में बदलाव लाएगा।
‘मीनार के कलश को सपोर्ट देने वाली आयरन रॉड पूरी तरह से गल चुकी थी। कलश में हर एक फुट पर जोड़ था, जिसमें से बारिश का पानी, नमी लोहे की रॉड पर पहुंची। अब स्टील की रॉड डालकर कलश लगाया जाएगा। बाकी मीनारों की भी जांच कर रहे हैं’
-डॉ. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद्, आगरा सर्किल