केंद्र ने राज्यों को कोविड-19 टीकाकरण के बाद दुष्प्रभार्व (एईएफआई) की निगरानी के लिए व्यवस्था बनाने को कहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. मनोहर अगनानी ने इस बारे में पत्र लिखकर कहा है कि किसी राज्य या जिले में टीके का दुष्प्रभाव मिले, इसकी सूचना तुरंत दर्ज करें। सरकार ने प्राथमिकता वाले समूहों के टीकाकरण के लिए टीका आने से पहले तैयारियां शुरू कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य चिकित्सकों,खासतौर मस्तिष्क, हृदय, श्वास और बाल रोग विशेषज्ञों को लेकर एईएफआई समितियां बनाएं। हृदय रोग, स्ट्रोक, आदि एक से अधिक बीमारी से पीड़ित कोविड-19 के वयस्क मरीजों को ये टीके दिए जाएंगे। उन पर टीके का दुष्प्रभाव हुआ तो विशेषज्ञ बारीकी से पहचान सकेंगे।
आगे कहा, हर राज्य एक-एक एईएफआई तकनीकी समन्वय केंद्र भी अपने किसी मेडिकल कॉलेज में बनाएं, जो दुष्प्रभावों की वजह जानने और चिकित्सा सहायता मुहैया करवाने में मदद देंगे। पत्र में कहा गया है कि जब टीकाकरण बड़ी संख्या में होगा तो दुष्प्रभाव के ज्यादा मामले भी दर्ज हो सकते हैं, इनका फॉलोअप विशेषज्ञों से करवाने की जरूरत है।
फंड चाहिए तो मांगे
एईएफआई विशेषज्ञों की समिति बनाने के लिए जरूरत होने पर यूपी, एमपी, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा को केंद्र ने फंड मांगने केलिए कहा है। वहीं निर्देश दिए हैं कि सभी जिला टीकाकरण अधिकारी अपने यहां मौजूद सरकारी, प्राइवेट व अन्य चिकित्सा संस्थानों की सूची बनाएं। देश में 300 मेडिकल कॉलेज व प्रमुख अस्पतालों में दवा के रिएक्शन की निगरानी के लिए केंद्र बने हैं, यहां से भी एईएफआई के मामलों की जानकारी दर्ज करें।