सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्यों को साफ कहा कि अगर किसी राज्य ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए अपना अलग कानून बनाया है, तो उसे उसी कानून के मुताबिक नियुक्ति करनी होगी। लेकिन जिन राज्यों में ऐसा कोई कानून नहीं है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
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'वैध कानून है, उन्हें उसी कानून का पालन करना होगा'
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही को बंद कर दिया। इन राज्यों ने डीजीपी नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम सुझाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में डीजीपी नियुक्ति को लेकर वैध कानून है, उन्हें उसी कानून का पालन करना होगा। वहीं जिन राज्यों में ऐसा कानून नहीं है, उन्हें पुलिस सुधार से जुड़े प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय नियमों को मानना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही दिए थे निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिए थे कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी द्वारा सुझाए गए तीन सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पैनल में से की जाएगी। साथ ही डीजीपी को कम से कम दो साल का निश्चित कार्यकाल दिया जाएगा। इस सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य ने डीजीपी नियुक्ति के लिए कानून बनाया है, जिसके तहत चयन एक समिति करेगी जिसकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज करेंगे। वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को बताया कि उसने डीजीपी नियुक्ति के लिए यूपीएससी को नाम भेज दिए हैं।
पश्चिम बंगाल को डीजीपी को राज्यसभा भेजने में ज्यादा दिलचस्पी- सीजेआई
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को डीजीपी को राज्यसभा भेजने में ज्यादा दिलचस्पी रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब राज्य को स्थायी डीजीपी मिल सकेगा क्योंकि राज्यसभा में फिलहाल कोई सीट खाली नहीं है। इस बीच अदालत द्वारा नियुक्त अमीकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने कहा कि डीजीपी, मुख्य सचिव और गृह सचिव जैसे शीर्ष पदों पर नियुक्ति सरकार को ही करनी चाहिए क्योंकि इन अधिकारियों पर सरकार का भरोसा होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस राय से सहमति जताई और कहा कि डीजीपी की नियुक्ति किसी बड़े पैनल के जरिए करने की जरूरत नहीं है।
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छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकार से जवाब तलब
अदालत ने छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकार से डीजीपी नियुक्ति को लेकर दो हफ्ते के भीतर जवाब भी मांगा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों द्वारा डीजीपी नियुक्ति में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी और यूपीएससी को निर्देश दिया था कि अगर राज्य प्रस्ताव भेजने में देरी करें तो इसकी जानकारी अदालत को दी जाए। यूपीएससी ने अदालत को बताया कि कई राज्य डीजीपी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने में देरी करते हैं और नियमित नियुक्ति के बजाय लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी से काम चलाते रहते हैं। इससे योग्य और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को इस पद के लिए मौका नहीं मिल पाता।
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