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अयोध्या विवाद : गिरिराज बोले- हिंदुओं के सब्र का बांध टूट रहा है, स्वामी ने कहा कुछ करना होगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 29 Oct 2018 11:12 AM IST
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ram mandir

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित जमीन के मालिकाना हक के मामले में सुनवाई जनवरी तक टाल दी। तारीख पर तारीख मिलने के बाद सियासत और बयानबाजी और तेज हो गई है। भाजपा के कुछ नेता और हिंदू संगठन जहां सरकार से अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने मंदिर पर अध्यादेश की सुगबुगाहट पर पीएम नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। जनवरी 2019 तक सुनवाई टलने का मतलब साफ है कि लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या मामले में फैसले की उम्मीद कम है, क्योंकि अप्रैल-मई 2019 में आम चुनाव कराए जा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि इस मुद्दे पर किसने क्या कहा-

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह- 'अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है। मुझे भय है कि अगर हिंदुओं का सब्र टूटा तो क्या होगा?'

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी- 'वह क्यों नहीं लाते (राम मंदिर पर अध्यादेश)? उन्हें ऐसा करने दो। हर समय वह धमकी देते रहते हैं कि वह अध्यादेश लेकर आएंगे। भाजपा, आरएसएस और वीएचपी का हर टॉम, डिक और हैरी यही कहता है। करिए... आप पावर में हैं। मैं आपको ऐसा करने की चुनौती देता हूं। देखते हैं।'कि हिंदुओं का सब्र टूटा तो क्या होगा।'


 
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी - 'हमें दिसंबर में समीक्षा करनी चाहिए कि राम मंदिर विवाद मामले को जल्दी से स्थगित किया जा रहा है या फिर दोबारा कांग्रेस के वकील मामले को टालने के लिए अन्य चीजें खोज लेंगे। अगर इसमें देरी हो रही है तो हमें कुछ करना होगा।'

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य-  मैं इसपर कुछ नहीं कहना चाहता क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है। हालंकि, सुनवाई को टालने से अच्छा संकेत नहीं मिला है।

भाजपा सांसद विनय कटियार ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- हिंदू समाज के बड़े साधु संत बैठकर विचार करेंगे कि आगे क्या किया जाए।

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी- 'वह क्यों नहीं लाते (राम मंदिर पर अध्यादेश)? उन्हें ऐसा करने दो। हर समय वह धमकी देते रहते हैं कि वह अध्यादेश लेकर आएंगे। भाजपा, आरएसएस और वीएचपी का हर टॉम, डिक और हैरी यही कहता है। करिए... आप पावर में हैं। मैं आपको ऐसा करने की चुनौती देता हूं। देखते हैं।'

विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये कानून बनाने की वकालत की, विहिप के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा- हम अदालत के फैसले के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कर सकते।
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पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम- 'इस कहानी को सब जानते हैं। चुनाव से हर पांच साल पहले, भाजपा राम मंदिर पर विचारों में फूट डालने की कोशिश करती है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति यह है कि मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है, फैसला आने से पहले सबको इंतजार करना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि हमें बीच में आना चाहिए।'

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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित जमीन के मालिकाना हक के मामले में सुनवाई जनवरी तक टाल दी। तारीख पर तारीख मिलने के बाद सियासत और बयानबाजी और तेज हो गई है। भाजपा के कुछ नेता और हिंदू संगठन जहां सरकार से अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने मंदिर पर अध्यादेश की सुगबुगाहट पर पीएम नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। जनवरी 2019 तक सुनवाई टलने का मतलब साफ है कि लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या मामले में फैसले की उम्मीद कम है, क्योंकि अप्रैल-मई 2019 में आम चुनाव कराए जा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि इस मुद्दे पर किसने क्या कहा-

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह- 'अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है। मुझे भय है कि अगर हिंदुओं का सब्र टूटा तो क्या होगा?'

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी- 'वह क्यों नहीं लाते (राम मंदिर पर अध्यादेश)? उन्हें ऐसा करने दो। हर समय वह धमकी देते रहते हैं कि वह अध्यादेश लेकर आएंगे। भाजपा, आरएसएस और वीएचपी का हर टॉम, डिक और हैरी यही कहता है। करिए... आप पावर में हैं। मैं आपको ऐसा करने की चुनौती देता हूं। देखते हैं।'कि हिंदुओं का सब्र टूटा तो क्या होगा।'
 
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी - 'हमें दिसंबर में समीक्षा करनी चाहिए कि राम मंदिर विवाद मामले को जल्दी से स्थगित किया जा रहा है या फिर दोबारा कांग्रेस के वकील मामले को टालने के लिए अन्य चीजें खोज लेंगे। अगर इसमें देरी हो रही है तो हमें कुछ करना होगा।'

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य-  मैं इसपर कुछ नहीं कहना चाहता क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है। हालंकि, सुनवाई को टालने से अच्छा संकेत नहीं मिला है।

भाजपा सांसद विनय कटियार ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- हिंदू समाज के बड़े साधु संत बैठकर विचार करेंगे कि आगे क्या किया जाए।

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी- 'वह क्यों नहीं लाते (राम मंदिर पर अध्यादेश)? उन्हें ऐसा करने दो। हर समय वह धमकी देते रहते हैं कि वह अध्यादेश लेकर आएंगे। भाजपा, आरएसएस और वीएचपी का हर टॉम, डिक और हैरी यही कहता है। करिए... आप पावर में हैं। मैं आपको ऐसा करने की चुनौती देता हूं। देखते हैं।'

विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये कानून बनाने की वकालत की, विहिप के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा- हम अदालत के फैसले के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कर सकते।

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम- 'इस कहानी को सब जानते हैं। चुनाव से हर पांच साल पहले, भाजपा राम मंदिर पर विचारों में फूट डालने की कोशिश करती है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति यह है कि मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है, फैसला आने से पहले सबको इंतजार करना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि हमें बीच में आना चाहिए।'

supreme court - फोटो : PTI
कोर्ट के इस कदम को विश्व हिंदू परिषद ने अपनी जीत बताया है तो कांग्रेस ने कहा कि इस मामले में भाजपा का दोहरा रवैया खुलकर सामने आ गया। सीपीआई ने कहा कि कोर्ट ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अयोध्या मसले पर ज्यादा गहन अध्ययन की तरफ इशारा किया है। हिन्दू महासभा ने कोर्ट के रुख को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला से कहा कि कोर्ट ने अयोध्या मसले में जनवरी तक की तारीख देकर उनके इस रुख का समर्थन किया है कि केंद्र सरकार को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इसी तरह जलीकट्टू मामले में भी सरकार को जनभावनाओं के अनुरूप काम करने का समय दिया था। अब सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के रुख को देखते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में कानून बना देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा यह प्रचारित करना कि यूपी सरकार ने कोर्ट से मसले की जल्द सुनवाई की अपील नहीं की, सरासर गलत है। कोर्ट में न्यास और सरकार के वकीलों ने मामले की दीपावली के तुरंत बाद सुनवाई की अपील की जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। 


वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कहा कि यूपी सरकार के वकीलों ने मामले के जल्द सुनवाई का कोई प्रयास नहीं किया। इससे साबित होता है कि वह इस मामले को लटकाना चाहती है। भाजपा इसी मुद्दे के सहारे 2019 का आम चुनाव जीतना चाहती है, इसलिए वह इस मामले का हल निकालने के लिए प्रयास नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आया है जो कोर्ट के बाहर इस मामले की जल्द सुनवाई की बात कहती रहती है। 

वहीं दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता ने खुद अपनी ही सरकार से अपील की है कि केंद्र को अब 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और मंदिर निर्माण में देर नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के पास 100 करोड़ हिंदुओं के लिए समय नहीं है तो अब सरकार की जिम्मेदारी आ जाती है कि वह हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करे। 

सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने सुप्रीम कोर्ट के कदम को बिल्कुल सही बताया है। उन्होंने कहा कि बेंच गठित करने में जनवरी तक का समय लेने, और गठित कोर्ट के द्वारा सुनवाई की प्रक्रिया तय करने के फैसले से स्पष्ट है कि कोर्ट यह मानती है कि इस मामले का फैसला देने से पहले गहन अध्ययन करने की जरूरत है। इस मामले में हजारों पेज के दस्तावेज अलग-अलग भाषाओं में हैं। सभी जजों को उन्हें पढ़ने-समझने के लिए उन्हें समय मिलना चाहिए। जिस मामले का असर सौ करोड़ से अधिक की आबादी पर पड़ना हो, वैसे फैसले में इतनी देरी अपेक्षित है। उन्होंने कोर्ट के स्टैंड को बिल्कुल उचित कदम बताया। 

हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि यही सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक विषयों पर सुनवाई में थोड़ी भी देर नहीं करती है लेकिन देश के 100 करोड़ हिंदुओ की जनभावनाओं से जुड़े अहम मुद्दे के लिए उसके पास समय नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब नरेन्द्र मोदी सरकार को इस मामले पर तत्काल कानून लाना चाहिए और अपना चुनावी वायदा निभाना चाहिए। अगर भाजपा ऐसा नहीं करती है तो वे पूरे देश में भाजपा के खिलाफ अहिंसक प्रदर्शन करेंगे। 
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