SSC Recruitment Scam: पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी
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कर्मचारियों एवं शिक्षकों की भर्ती में जमकर सिफारिश
जांच एजेंसी द्वारा ममता सरकार में शामिल कई दूसरे मंत्रियों से भी पूछताछ की जा रही है। यहां भी दोनों एजेंसी एक साथ चल रही हैं। परेश अधिकारी के घर पर जांच एजेंसी की दस्तक हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के पूर्व सलाहकार शांति प्रसाद सिन्हा, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली और आठ अन्य आरोपियों के घरों पर सर्च की गई है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में इस बात के सबूत मिले थे कि पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग द्वारा की गई भर्ती में गड़बड़ी हुई है। राज्य के प्रायोजित व सहायता प्राप्त स्कूलों में समूह 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों एवं शिक्षकों की भर्ती में जमकर सिफारिश चली है। इसमें कथित तौर पर पैसे का लेन-देन भी सामने आया था। इसके बाद ईडी ने इस मामले में जांच शुरू की थी। जब कैबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी की सहयोगी रही अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मामले की परतें खुलने लगीं। अर्पिता मुखर्जी के आवास से जो दो दर्जन मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, वह ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी से जुड़े नेताओं के लिए एक बड़ी मुसीबत का संकेत है।
क्या बन पाएगा तीसरा मोर्चा?
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। अब जल्द ही यह भी मालूम हो जाएगा कि बाकी का पैसा कहां लगाया गया है। पहले अर्पिता मुखर्जी और बाद में जब पार्थ चटर्जी, जांच एजेंसी की पूछताछ के दायरे में आए तो इन दोनों की बातों ने काफी हद तक जांच एजेंसी की राह आसान बना दी। अब दूसरे मंत्रियों के अलावा सीएम कार्यालय पर एजेंसी की नजर है। देर-सवेर वहां के पूर्व अधिकारियों के यहां जांच एजेंसी सर्च कर सकती है। बताया गया है कि दो पूर्व अधिकारी अब रिटायर हो चुके हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी। देर सवेर, ममता बनर्जी पर इस कथित घोटाले की आंच आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो ममता बनर्जी, केंद्र की विपक्ष की राजनीति में जिस तरह से अपनी बातों को आगे रख रही थी, वह राह मुश्किल हो जाएगी। खासतौर से 2024 के लिए तीसरे मोर्चे के गठन का प्रयास और कांग्रेस पार्टी को पीछे रखने के उनके प्रयासों को बड़ा धक्का लग सकता है।