आईबीजी के तहत हो रहीं मिलिट्री एक्सरसाइज
सैन्य सूत्रों ने बताया कि भले ही आईबीजी को लेकर अभी तक सरकार या सेना की तरफ से कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन आईबीजी के तहत कई मिलिट्री एक्सरसाइज आयोजित की जा चुकी हैं, जो काफी सक्सेसफुल रही हैं। 2019 में बी कोरोना से पहले अक्तूबर 2019 में 17 कोर के तहत भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में "हिम विजय" सैन्य अभ्यास किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य इन आईबीजी का ट्रायल करना और पहाड़ी इलाकों में युद्ध के हालात में इसके प्रभाव की जांच करना था। वहीं, इस मार्च 2024 में पोखरण के रेगिस्तानी इलाके में बड़े पैमाने पर 'भारत शक्ति' सैन्य अभ्यास आईबीजी के तहत ही किया गया था। इसमें तीनों सेनाओं ने हिस्सा लिया था।
कोरोना के चलते हुई देरी
साल 2017 में, 'जॉइंट ट्रेनिंग डॉक्ट्रिन ऑफ द इंडियन आर्म्ड फोर्सेज' और 2018 में, 'इंडियन आर्मी लैंड वॉरफेयर ड्रॉक्ट्रिन' में सबसे पहले बताया गया था, भविष्य के सभी युद्ध अभियान आईबीजी के तहत होंगे। जिसके बाद पहली बार इस कॉन्सेप्ट को देश की आधिकारिक मिलिट्री पॉलिसी में जगह मिली थी। 14 सैनिकों वाली लाख भारतीय सेना में 'पायलट प्रोजेक्ट' के पहले में पाकिस्तान के साथ पश्चिमी मोर्चे पर दो आईबीजी का गठन किया गया। वहीं, दूसरे चरण में चीन के साथ पूर्वी मोर्चे पर 17 'माउंटेन स्ट्राइक' कोर (पानागढ़) में पांच आईबीजी बनाई जा चुकी हैं। इसमें पानागढ़ स्थित 59 माउंटेन डिविजन को 3 इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स में बांट दिया गया। आईबीजी योजना के तहत 8 से 10 इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स बनाने की योजना थी, जिसे आने वाले सालों में और बढ़ाने की तैयारी थी।
शुरू में तो आईबीजी बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ा, लेकिन कोराना के चलते यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। तत्कालीन आर्मी चीफ मनोज नरवणे ने कहा था कि इसके लिए जरूरी ट्रायल्स पूरे हो चुके हैं, लेकिन कोरोनोवायरस के चलते इसके लागू करने में देरी होती रही है। हालांकि वे इस बात को लेकर आश्वस्त दिखे कि अपेक्षित समय सीमा में आईबीजी को लागू कर दिया जाएगा। क्योंकि इसके लिए वैचारिक विचार विमर्श पहले ही तैयार हो चुका है और कोरोना से पहले ही जरूरी ट्रायल्स कर लिए गए थे।
आईबीजी दिल्ली की 'कोल्ड स्टार्ट' थ्योरी का हिस्सा
ट्राई सर्विस कॉलेज ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट के विभागीय प्रमुख रह चुके रिटायर्ड मेजर जनरल हर्ष काकर के मुताबिक हमने पहले ही आईबीजी के कुछ फॉर्मेशन के साथ ट्रायल्स किए हैं, जो बहुत प्रभावी रहे हैं। हालांकि अभी तक सरकार या सेना ने इस पर आधिकारिक तौर पर कोई अपडेट की घोषणा नहीं की है। लेकिन भारत शक्ति अभ्यास से यह संकेत मिलता है कि अगर आर्म्ड फोर्सेस को आईबीजी के तहत लाना ही सेनाओं का भविष्य है और हम इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। वह कहते हैं कि आईबीजी को नई दिल्ली के 'कोल्ड स्टार्ट' थ्योरी के हिस्से के तौर पर देखा जाता है, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर पश्चिमी सीमा पर अगर कोई सैन्य हमला होता है, तो उसका तुरंत मुंह तोड़ जवाब दिया जाए। वह कहते हैं कि अगर आईबीजी के सेना में शामिल होने के बाद चीन या पाकिस्तान अगर हमले की जुर्रत करते हैं, तो आर्मी ट्रूप्स का मोबिलाइजेशन आसान हो जाएगा, और दुश्मन को जोरदार जवाब दिया जा सकेगा
थिएटर कमांड के साथ तालमेल बैठाने की तैयारी
2021 में सेना की तरफ से कुछ रिपोर्ट्स आईं थीं कि भारतीय सेना इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स को 'फाइनल टच' दे रही है। जिनमें से प्रत्येक में लगभग 5,000 सैन्य बल होने की बात कही गई थी और उन्हें देश की पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं पर तैनात करना शुरू कर दिया गया है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक सेना मुख्यालय ने पहले रक्षा मंत्रालय को सेना के 'आईबीजी-करण' की पहले चरण की रिपोर्ट सौंपी थी। लेकिन रक्षा मंत्रालय ने गर्वनमेंट सेंक्शन लेटर जारी करने से पहले (सरकारी मंजूरी) पहले दूसरे चरण की रिपोर्ट भी मांगी है। सत्र बताते हैं कि सरकार यह अच्छे से देख लेना चाहती है कि आईबीजी मॉडल चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए बनाई जाने वालीं तीन प्रस्तावित थिएटर कमांड में किस तरह से फिट बैठता है।
क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स यानी आईबीजी?
इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड में जहां थल सेना, वायुसेना और नौसेना को शामिल करते हुए रणनीतिक स्तर के सुधार शामिल हैं। तो वहीं, आईबीजी मॉडल सेना के भीतर ही एक टैक्टिकल पुनर्गठन है। इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के सेना में शामिल होने के बाद सेना की ताकत और बढ़ जाएगी और सेना पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो जाएगी। आईबीजी को हमले की स्थिति में दुश्मन के खिलाफ तेजी से हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हमले की स्थिति में आईबीजी 12 से 48 घंटे में लोकेशन पर पहुंच जाएगी। खास बात यह होगी कि आईबीजी सेना की ब्रिगेड (3,000 सैनिक) से बड़ी होगी, लेकिन डिविजन (12,000 सैनिक) से छोटी होगी। एक आईबीजी में 5,000-6,000 सैनिक होंगे, साथ ही पैदल सेना, टैंक, तोपखाने, एयर डिफेंस, सिग्नल्स, इंजीनियर्स समेत दूसरी यूनिट्स की परमानेंट तैनाती की जाएगी। अब तक, ये यूनिट्स केवल सैन्य अभ्यास या युद्ध के दौरान ही एक साथ आती रही हैं। वहीं, प्रत्येक आईबीजी का नेतृत्व एक मेजर जनरल रैंक का अफसर करेगा। चीनी सीमा यानी एलएसी पर जो आईबीजी तैनात होगी, उसमें पैदल सेना के अलावा हल्के तोपखाने और माउंटेन वॉरफेयर के लिए लाइट मैकेनाइज्ड फोर्सेज शामिल होंगी। वहीं पाकिस्तानी सीमा पर मुख्य युद्धक टैंक और भारी तोपखाने को शामिल किया जाएगा।